Arvind Kejriwal News: शराब नीति मामले में बरी होने के बाद बोले केजरीवाल – “मेरे खिलाफ एक भी सबूत नहीं”
दिल्ली की कथित शराब नीति घोटाला मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए अदालत ने आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal, पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia समेत 21 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच एजेंसी को नीति में किसी ‘व्यापक साजिश या आपराधिक इरादे’ का पर्याप्त आधार नहीं मिला।
फैसले के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल ने इसे “ऐतिहासिक निर्णय” बताया और न्यायपालिका का धन्यवाद किया।
“जज साहब ने हिम्मत दिखाई”
केजरीवाल ने कहा, “कोर्ट ने आज एक बहुत ऐतिहासिक फैसला दिया है। मैं ज्यूडिशियरी का धन्यवाद करना चाहता हूं। आज के माहौल में जब संस्थाओं को डराया और धमकाया जा रहा है, ऐसे में इतना बड़ा न्याय करने के लिए जज साहब ने वाकई हिम्मत दिखाई है।”
उन्होंने अपने वकीलों का भी आभार जताते हुए कहा कि चार साल से चली आ रही कानूनी लड़ाई में उन्होंने हर कदम पर साथ दिया।
CBI और ED पर निशाना
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों से ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर उनके खिलाफ “झूठा शराब घोटाला” गढ़ा गया। उन्होंने कहा कि अदालत ने करीब 600 पन्नों के आदेश में सबूतों और गवाहों के बयानों की समीक्षा के बाद यह पाया कि मुकदमा चलाने लायक भी पर्याप्त सामग्री नहीं है।
उन्होंने कहा, “CBI को मेरे खिलाफ एक छोटा सा भी सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने केस को पूरी तरह फर्जी बताया है। मैंने अपनी जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है।”
भावुक हुए केजरीवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल भावुक हो गए और कैमरे पर उनकी आंखों में आंसू नजर आए। उन्होंने कहा कि यह मामला स्वतंत्र भारत के इतिहास की “सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश” थी, जिसका मकसद उनकी और उनकी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाना था।
उन्होंने दो लोगों पर साजिश रचने का आरोप लगाया, हालांकि नाम नहीं लिया।
CBI करेगी हाईकोर्ट में अपील
इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी Central Bureau of Investigation ने कहा है कि वह निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देगी।
गौरतलब है कि इस केस में केजरीवाल करीब छह महीने तक जेल में रहे, जबकि मनीष सिसोदिया लगभग दो साल तक न्यायिक हिरासत में रहे। अदालत के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया और इसे “सत्य की जीत” बताया।
राजनीतिक असर क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का असर दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। जहां एक ओर AAP इसे नैतिक जीत के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी रहने की बात कह रहा है।
फिलहाल, अदालत के इस फैसले के बाद मामला एक नए मोड़ पर पहुंच गया है और अब सभी की नजरें हाईकोर्ट में संभावित अपील पर टिकी हैं।

