5 Mar 2026, Thu

मेट्रो में AC कितने नंबर पर चलता है, बार-बार गेट खुलने पर भी गर्मी क्यों नहीं लगती; सुनकर चौंकेंगे जरूर

Amazing Facts: मेट्रो में AC किस तापमान पर चलता है? जानिए क्यों बार-बार दरवाजे खुलने के बाद भी नहीं लगती गर्मी

आज के समय में मेट्रो शहरी परिवहन का सबसे तेज, सुरक्षित और आरामदायक साधन बन चुकी है। भारत के कई बड़े शहरों में मेट्रो नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और रोजाना लाखों लोग इसका इस्तेमाल करते हैं। देश के सबसे व्यस्त मेट्रो नेटवर्क की बात करें तो Delhi Metro Rail Corporation द्वारा संचालित Delhi Metro सबसे आगे है। हर दिन लाखों यात्री इस मेट्रो से सफर करते हैं और उन्हें गर्मी में भी आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलता है।

मेट्रो में सफर करते समय आपने जरूर महसूस किया होगा कि भीषण गर्मी में भी कोच के अंदर ठंडक बनी रहती है। कई बार तो स्टेशन पर बार-बार दरवाजे खुलने के बावजूद भी अंदर गर्मी महसूस नहीं होती। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर मेट्रो में लगा एसी कितने टन का होता है और इसका तापमान कितना सेट किया जाता है।

मेट्रो में कितने टन का AC लगा होता है

जानकारी के अनुसार मेट्रो कोच में काफी हाई-कैपेसिटी एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाया जाता है। एक मेट्रो कोच में लगभग 12 टन क्षमता तक का एसी सिस्टम लगाया जा सकता है। इतना शक्तिशाली एसी यात्रियों की संख्या और बाहरी तापमान को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाता है।

मेट्रो में इस्तेमाल होने वाला एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगभग 42.2 किलोवाट तक बिजली की खपत कर सकता है। इसका मतलब है कि एक घंटे में मेट्रो का एसी करीब 42 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल कर सकता है। यही वजह है कि गर्मी के मौसम में भी मेट्रो के अंदर तापमान संतुलित बना रहता है।

मेट्रो में AC का तापमान कितना होता है

मेट्रो में एसी सामान्य घर या ऑफिस के एसी की तरह किसी एक नंबर पर नहीं चलता। इसका तापमान ऑटोमैटिक सेंसर सिस्टम से नियंत्रित किया जाता है। मेट्रो कोच में तापमान सेंसर लगे होते हैं जो यात्रियों की संख्या और अंदर के तापमान के आधार पर एसी की कूलिंग को नियंत्रित करते हैं।

आमतौर पर मेट्रो के अंदर का तापमान लगभग 25 डिग्री सेल्सियस पर सेट किया जाता है। हालांकि यदि कोच में यात्रियों की संख्या ज्यादा हो जाती है तो तापमान को 26 से 27 डिग्री सेल्सियस तक एडजस्ट कर दिया जाता है ताकि अंदर का माहौल संतुलित बना रहे।

मेट्रो के अंदर क्यों नहीं लगती गर्मी

मेट्रो के गेट हर स्टेशन पर खुलते और बंद होते हैं, फिर भी अंदर गर्मी क्यों नहीं लगती? इसके पीछे कई तकनीकी कारण हैं।

सबसे पहले, मेट्रो के दरवाजे स्लाइडिंग और हाई-स्पीड मैकेनिज्म से काम करते हैं, जिससे वे बहुत कम समय के लिए खुले रहते हैं। इससे बाहर की गर्म हवा अंदर आने का मौका कम मिलता है।

दूसरा कारण है मेट्रो में लगे हाई-कैपेसिटी एचवीएसी सिस्टम (HVAC)। जैसे ही दरवाजे बंद होते हैं, एसी सिस्टम तेजी से ठंडी हवा छोड़कर कुछ ही सेकंड में अंदर का तापमान फिर से संतुलित कर देता है।

इसके अलावा मेट्रो कोच की बॉडी को बेहतर इंसुलेशन टेक्नोलॉजी से बनाया जाता है, जिससे बाहरी गर्मी अंदर नहीं आ पाती। कई मेट्रो स्टेशनों पर भी एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगे होते हैं, जिससे प्लेटफॉर्म का तापमान भी नियंत्रित रहता है।

इन्हीं तकनीकी व्यवस्थाओं की वजह से मेट्रो में यात्रियों को भीषण गर्मी के मौसम में भी ठंडा और आरामदायक सफर मिलता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *