26 Mar 2026, Thu

मुर्गी पकड़ना, रस्साकशी और दौड़, पश्तून पाकिस्तानियों का ईद मनाने का अनोखा तरीका-देखें वीडियो

पश्तून पाकिस्तानी समुदाय ने इस ईद-उल-फितर को अपने पारंपरिक अंदाज में मनाकर एक बार फिर अपने सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई। बलूचिस्तान प्रांत के पहाड़ी पिशिन जिले में आयोजित इस आयोजन में सैकड़ों पश्तून ने पारंपरिक खेलों में हिस्सा लिया, जिनमें मुर्गी पकड़ना, रस्साकशी और दौड़ जैसी गतिविधियां शामिल थीं। इन खेलों को देखने के लिए आसपास के दूर-दराज इलाकों से भी बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे, जिससे इस उत्सव की खासियत और महत्व और बढ़ गया।

बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा और आर्थिक रूप से पिछड़ा प्रांत, लंबे समय से उग्रवाद और अशांति का केंद्र रहा है। ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगे इस क्षेत्र में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियां अक्सर सुरक्षा बलों और स्थानीय नागरिकों को प्रभावित करती रही हैं। ऐसे में पारंपरिक खेलों का आयोजन न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक शांति और सामुदायिक एकजुटता का संदेश भी देता है।

खेलों के आयोजक सैयद जियाउद्दीन ने बताया कि यह आयोजन उनके पूर्वजों से विरासत में मिली परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “ये हमारे सांस्कृतिक खेल हैं, जिन्हें हमने एक बार फिर से पुनर्जीवित किया है। अब हम हर साल, हर ईद पर ऐसे खेल आयोजित करेंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि इन खेलों के माध्यम से युवा शक्ति, सहनशीलता और सामूहिक प्रतियोगिता की भावना सीखते हैं।

रस्साकशी प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सिराज-उद-दीन ने बताया कि यह खेल उनकी ताकत और सामर्थ्य का प्रदर्शन करने का पारंपरिक तरीका है। उन्होंने कहा, “हमारे इलाके में मेहनती लोग रहते हैं, और रस्साकशी के खेल में व्यक्ति की ताकत का वास्तविक मूल्यांकन होता है। यह हमारे सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है।” मुर्गी पकड़ना और दौड़ जैसे खेलों में भी युवाओं की फुर्ती और कौशल दिखाई देती है, जो पारंपरिक खेलों को और अधिक रोचक बनाते हैं।

स्थानीय निवासी सैयद कमाल शाह का कहना है कि इस तरह के उत्सव इलाके में शांति और सकारात्मक माहौल लाने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा, “हमारे इलाके में हाल के वर्षों में अशांति बढ़ी है। ऐसे उत्सव न केवल लोगों को जोड़ते हैं, बल्कि मादक पदार्थों और तस्करी जैसी समस्याओं पर रोक लगाने में भी सहायक होते हैं।”

विशेष रूप से बलूचिस्तान में आयोजित ये पारंपरिक खेल क्षेत्र के युवाओं को सकारात्मक दिशा में जोड़ते हैं। इससे न केवल उनकी शारीरिक फिटनेस बढ़ती है, बल्कि उन्हें समुदाय के साथ जुड़ाव और अपने सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का अवसर भी मिलता है। इस आयोजन ने दर्शकों को भी अपनी पुरानी सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू कराते हुए बच्चों और युवाओं में खेल और परंपरा के प्रति रुचि बढ़ाई है।

इस प्रकार, पश्तून पाकिस्तानी समुदाय ने ईद-उल-फितर के मौके पर अपने अनोखे और पारंपरिक तरीके से न केवल त्योहार मनाया, बल्कि समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक सामंजस्य का भी संदेश दिया। यह आयोजन साबित करता है कि कठिन परिस्थितियों और अशांति के बीच भी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना संभव है और इससे समुदाय के लोगों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

यह उत्सव बलूचिस्तान के पहाड़ी क्षेत्रों में सांस्कृतिक, सामाजिक और शारीरिक गतिविधियों का मेल है, जो न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि युवाओं को अनुशासन, धैर्य और सामूहिक प्रतिस्पर्धा का महत्व भी सिखाता है।

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