नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026:
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उज्जैन स्थित प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ‘VIP दर्शन’ की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह न्यायपालिका का काम नहीं है कि वह तय करे मंदिर में कौन, कब और कैसे प्रवेश करेगा।
याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने दलील दी कि मंदिर में दर्शन को लेकर एक समान नीति होनी चाहिए, विशेष रूप से गर्भगृह में प्रवेश के मामले में। उनका कहना था कि VIP दर्शन जैसी व्यवस्थाएं आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव पैदा करती हैं।
इस पर सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने टिप्पणी की,
“महाकाल के सामने कोई VIP नहीं होता।”
मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि मंदिर प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े निर्णय संबंधित प्राधिकरणों द्वारा लिए जाने चाहिए, न कि अदालतों द्वारा।
“कोर्ट सिर्फ न्यायिक मामलों पर विचार करती है। यह तय करना कि किसे कब दर्शन की अनुमति दी जाए, अदालत का कार्यक्षेत्र नहीं है,” उन्होंने कहा।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के साथ ही याचिका को खारिज कर दिया गया।

