बंगाल चुनाव 2026: अमित शाह का ममता सरकार पर हमला, घुसपैठ और भ्रष्टाचार बना बड़ा मुद्दा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मी तेज हो गई है और इसी के साथ सियासी बयानबाजी भी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। कोलकाता में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने Mamata Banerjee और उनकी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल के शासन को “अराजकता का काला अध्याय” करार देते हुए जनता के सामने एक तरह की ‘चार्जशीट’ पेश की।
घुसपैठ पर तीखा हमला
अमित शाह ने अपने संबोधन में सबसे ज्यादा जोर घुसपैठ के मुद्दे पर दिया। उन्होंने कहा कि असम में भाजपा सरकार बनने के बाद घुसपैठ पर प्रभावी रोक लगी है, लेकिन पश्चिम बंगाल अब भी एक प्रमुख रास्ता बना हुआ है। शाह ने ममता बनर्जी को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि भाजपा की सरकार बनते ही “एक-एक घुसपैठिए की पहचान कर उन्हें न केवल मतदाता सूची से हटाया जाएगा, बल्कि देश से बाहर भी किया जाएगा।”
उन्होंने यह भी वादा किया कि सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाएगी और सीमा को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा।
चुनाव को बताया “मुक्ति का अवसर”
शाह ने इस चुनाव को राज्य की जनता के लिए “मुक्ति का चुनाव” बताया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोग भय और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। उनके मुताबिक, लोगों को जान-माल की सुरक्षा, रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर डर का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने जनता के सामने दो विकल्प रखे—
- भय से मुक्ति: हिंसा, लूट और असुरक्षा से आजादी
- भरोसे की गारंटी: शांति, विकास, मुफ्त इलाज, पक्का घर और युवाओं के लिए बेहतर अवसर
विकास और उद्योग पर सवाल
अमित शाह ने बंगाल में उद्योगों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की कमी के कारण फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं और रोजगार के अवसर घटे हैं। “सोनार बांग्ला” का सपना दिखाकर टीएमसी ने “सिंडिकेट राज” स्थापित किया है, जिससे आम जनता का शोषण हुआ है।
युवाओं के लिए बड़े वादे
शाह ने शिक्षक भर्ती समेत अन्य घोटालों का जिक्र करते हुए युवाओं के लिए अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदवारों की उम्र भर्ती घोटालों के कारण निकल गई है, उन्हें भाजपा सरकार बनने पर 5 साल की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। साथ ही SSC भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर प्रभावित युवाओं को दोबारा मौका दिया जाएगा।
सियासी माहौल गर्म
अमित शाह के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। भाजपा जहां घुसपैठ, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बना रही है, वहीं टीएमसी भी इन आरोपों का जवाब देने में जुट गई है।
आने वाले दिनों में चुनावी रैलियों और घोषणाओं के साथ यह मुकाबला और तीखा होने की संभावना है। साफ है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में घुसपैठ, विकास और युवाओं के मुद्दे ही सियासी बहस के केंद्र में रहने वाले हैं।

