Annamanda Mahadeva Temple में उत्सव के दौरान हाथी का हमला, पुजारी गंभीर रूप से घायल
केरल के त्रिशूर जिले स्थित अन्नमनदा महादेव मंदिर में गुरुवार को एक धार्मिक उत्सव के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मंदिर परिसर में शोभा यात्रा की तैयारियों के बीच सजे-धजे हाथी ने अचानक हिंसक व्यवहार करते हुए एक पुजारी पर हमला कर दिया। हाथी ने पुजारी को अपनी सूंड में लपेटकर जमीन पर पटक दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
शोभा यात्रा से पहले मचा हड़कंप
जानकारी के अनुसार, मंदिर में पारंपरिक शोभा यात्रा की तैयारी चल रही थी। महावत हाथी को भव्य रूप से सजाकर मंदिर प्रांगण में लाया था। धार्मिक परंपरा के तहत भगवान की प्रतिमा को हाथी पर विराजमान कर झांकी निकाली जानी थी।
प्रतिमा स्थापित करने से पहले एक पुजारी को हाथी पर बैठाने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान अचानक हाथी बेकाबू हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाथी ने पास खड़े पुजारी को सूंड से पकड़ लिया और जोर से जमीन पर पटक दिया। इसके बाद उसने पुजारी को दोबारा हवा में उठा लिया।
इस अप्रत्याशित घटना से मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और अन्य पुजारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कुछ देर के लिए पूरा माहौल दहशत में बदल गया।
महावत की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
राहत की बात यह रही कि महावत ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की और कुछ ही क्षणों में हाथी पर काबू पा लिया। यदि हाथी अधिक देर तक बेकाबू रहता, तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
घायल पुजारी को तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, उन्हें गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
मंदिर उत्सवों में हाथियों की परंपरा
केरल में मंदिर उत्सवों के दौरान सजे हुए हाथियों की उपस्थिति एक पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान मानी जाती है। खासकर त्रिशूर जिले में कई बड़े मंदिरों में हाथियों के साथ शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। हालांकि, समय-समय पर ऐसे हादसे भी सामने आते रहे हैं, जब अचानक शोर, भीड़ या अन्य कारणों से हाथी उत्तेजित हो जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्सवों में हाथियों की सुरक्षा और व्यवहार पर कड़ी निगरानी आवश्यक है। भीड़, तेज आवाज और आतिशबाजी जैसे तत्व हाथियों को असहज कर सकते हैं, जिससे वे आक्रामक हो सकते हैं।
प्रशासन कर सकता है जांच
स्थानीय प्रशासन द्वारा घटना की जांच की संभावना जताई जा रही है। यह भी देखा जाएगा कि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। मंदिर प्रबंधन ने भी घटना पर खेद जताते हुए घायल पुजारी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।
यह घटना एक बार फिर मंदिर उत्सवों में पशु सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े करती है। श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देना भी उतना ही जरूरी है।

