UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, इस्लामोफोबिया पर ‘काल्पनिक कहानियां’ गढ़ने का लगाया आरोप
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरते हुए उस पर झूठे आरोप गढ़ने और अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘इस्लामोफोबिया से निपटने के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ पर बोलते हुए भारत ने साफ कहा कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान का रवैया पूरी तरह से भ्रामक और राजनीतिक है।
भारत की ओर से कड़ा बयान
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि “इस्लामोफोबिया की काल्पनिक कहानियां गढ़ना इस्लामाबाद की पुरानी आदत बन चुकी है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए करता रहा है।
OIC के इस्तेमाल पर सवाल
भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) का इस्तेमाल एक राजनीतिक हथियार के रूप में करता है। हरीश ने कहा कि OIC के मंच का उपयोग भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया जाता है, जो पूरी तरह से अनुचित है।
पाकिस्तान के आंतरिक हालात पर उठाए सवाल
भारत ने पाकिस्तान के भीतर अल्पसंख्यकों के हालात पर भी गंभीर सवाल उठाए। विशेष रूप से अहमदिया मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित उत्पीड़न का जिक्र करते हुए भारत ने कहा कि पाकिस्तान अपने ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहा है।
इसके अलावा, भारत ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान लाखों अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेज रहा है और रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर हवाई हमले कर रहा है। भारत ने सवाल किया कि इन घटनाओं को क्या नाम दिया जाए।
भारत की स्थिति स्पष्ट
भारत ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि देश में 20 करोड़ से अधिक मुस्लिम आबादी स्वतंत्र रूप से अपने अधिकारों का प्रयोग करती है, जिसमें मतदान और राजनीतिक प्रतिनिधित्व शामिल है। भारत ने कहा कि यहां सभी धर्मों और समुदायों के बीच सदियों से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की परंपरा रही है।
संयुक्त राष्ट्र से अपील
भारत ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह धार्मिक पहचान के राजनीतिक दुरुपयोग पर गंभीरता से ध्यान दे। हरीश ने कहा कि किसी एक धर्म को केंद्र में रखकर बनाई गई नीतियां वैश्विक संतुलन को बिगाड़ सकती हैं।
उन्होंने 1981 की धार्मिक असहिष्णुता और भेदभाव उन्मूलन घोषणा का जिक्र करते हुए कहा कि यह सभी धर्मों के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक संतुलित और समावेशी दस्तावेज है।
धर्म के नाम पर हिंसा की निंदा
भारत ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की हिंसा, घृणा और भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भारत ने वैश्विक समुदाय से अपील की कि वह ऐसे मुद्दों पर एकजुट होकर काम करे और किसी भी तरह के राजनीतिक एजेंडे से ऊपर उठकर समाधान तलाशे।
निष्कर्ष
संयुक्त राष्ट्र में भारत का यह बयान साफ संकेत देता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के आरोपों का मजबूती से जवाब देने की नीति पर कायम है। साथ ही, भारत ने वैश्विक स्तर पर धार्मिक सहिष्णुता और समानता के अपने दृष्टिकोण को भी स्पष्ट रूप से सामने रखा है।

