नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर चल रहे ट्रेड वॉर और टैरिफ बाधाओं के बीच खाड़ी देश भारत के लिए एक प्रमुख और रणनीतिक व्यापारिक साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। इसी कड़ी में भारत और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) ने मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने हेतु संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference – ToR) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
GCC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। यह समूह वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक बन चुका है, जो यूरोपीय संघ, आसियान, अमेरिका और चीन जैसे बड़े साझेदारों से भी आगे निकल गया है।
भारत–GCC व्यापार की मौजूदा स्थिति
वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत और GCC देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 178–179 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात करीब 57 अरब डॉलर और आयात लगभग 121.7 अरब डॉलर रहा। यह व्यापार मुख्य रूप से ऊर्जा क्षेत्र पर आधारित है। भारत GCC देशों से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करता है, जबकि रत्न-आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, मशीनरी, लोहा-इस्पात और अन्य औद्योगिक उत्पादों का निर्यात करता है।
FTA की दिशा में नई पहल
GCC क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं, जो भारत की अर्थव्यवस्था और रेमिटेंस के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। ट्रेड वॉर के मौजूदा माहौल में भारत और GCC के बीच FTA की दिशा में उठाया गया यह कदम बदलती वैश्विक व्यापार संरचना को दर्शाता है।
ToR पर हस्ताक्षर, वार्ता को नई गति
5 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में ToR पर हस्ताक्षर किए गए। ये शर्तें प्रस्तावित FTA के दायरे, बातचीत की प्रक्रिया और रणनीतिक ढांचे को तय करती हैं। यह समझौता 2004 में शुरू हुई वार्ताओं को दोबारा गति देगा, जिनके दो दौर 2006 और 2008 में हो चुके थे, लेकिन बाद में बातचीत ठप पड़ गई थी।
UAE के साथ CEPA (2022) और ओमान के साथ दिसंबर 2025 में हुए CEPA के अनुभव पर आधारित यह व्यापक समझौता अन्य GCC देशों के साथ व्यापारिक बाधाओं को कम करेगा।
FTA से संभावित फायदे
पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह, निवेश में वृद्धि, नीतिगत स्थिरता और खाद्य व ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देगा। भारत खाद्यान्न उत्पादन में मजबूत है, जबकि GCC तेल और गैस का बड़ा निर्यातक है। इससे दोनों पक्षों को लाभ मिलेगा। आईटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, पेट्रोकेमिकल, फूड प्रोसेसिंग और सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
विशेषज्ञों की राय
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी सैक्स ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए अगला बड़ा ग्रोथ मार्केट है। उन्होंने भारत को अमेरिका पर निर्भरता घटाकर दक्षिण-पूर्व एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका पर ध्यान देने की सलाह दी।
कुल मिलाकर, भारत–GCC FTA न केवल ट्रेड वॉर के असर को कम करेगा, बल्कि भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को भी वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा।

