भारत के रणनीतिक तेल भंडार: आयात रुकने पर 9.5 दिनों तक की आपूर्ति संभव, मौजूदा स्टॉक कम
देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आरटीआई (RTI) के जवाब में बताया है कि यदि कच्चे तेल के आयात में किसी प्रकार की रुकावट आती है, तो भारत के रणनीतिक भंडार लगभग 9.5 दिनों तक देश की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। हालांकि, यह आंकड़ा भंडारण क्षमता के पूर्ण उपयोग पर आधारित है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध स्टॉक इससे काफी कम है।
मौजूदा भंडारण और उपलब्ध स्टॉक
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 23 मार्च 2026 को राज्यसभा में प्रस्तुत डेटा में बताया गया कि भारत के पास वर्तमान में लगभग 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल मौजूद है। यह देश की कुल भंडारण क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन का लगभग 64 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि भारत के पास फिलहाल रणनीतिक स्तर पर सीमित बफर स्टॉक उपलब्ध है।
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) का उद्देश्य आपात स्थिति में देश को ऊर्जा संकट से बचाना है, जैसे कि युद्ध, वैश्विक आपूर्ति बाधा या कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि।
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व क्या हैं?
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सरकार द्वारा बनाए गए आपातकालीन कच्चे तेल के भंडार होते हैं, जिन्हें किसी भी संकट के समय उपयोग में लाया जाता है। इनका मुख्य उद्देश्य देश में ईंधन की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इन भंडारों का उपयोग विशेष रूप से उन परिस्थितियों में किया जाता है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बाधित हो या कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिले।
भारत में SPR की मौजूदा सुविधाएं
भारत में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम को 7 जनवरी 2004 को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद 16 जून 2004 को इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (ISPRL) की स्थापना की गई, जो इन भंडारों के संचालन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
वर्तमान में देश में तीन प्रमुख SPR सुविधाएं हैं:
- विशाखापत्तनम – 1.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता
- मंगलुरु – 1.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता
- पादुर – 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता
इन तीनों को मिलाकर देश की कुल रणनीतिक भंडारण क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है।
विस्तार की योजनाएं
सरकार ने जुलाई 2021 में SPR नेटवर्क के विस्तार को मंजूरी दी थी। इसके तहत दो नई सुविधाओं की योजना बनाई गई है—
- ओडिशा के चांदीखोल में 4 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता
- कर्नाटक के पादुर में अतिरिक्त 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता
इन दोनों परियोजनाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाना है। यदि ये परियोजनाएं पूरी हो जाती हैं, तो भारत की कुल रणनीतिक भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में रणनीतिक भंडार देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कवच की तरह काम करते हैं। हालांकि, मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि उपलब्ध बफर सीमित है, जिससे भविष्य में आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
निष्कर्ष
भारत के रणनीतिक तेल भंडार आपात स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन वर्तमान स्टॉक और क्षमता को देखते हुए यह साफ है कि देश को अपनी ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है। प्रस्तावित विस्तार परियोजनाएं इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती हैं, जिससे भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट का प्रभाव कम किया जा सके।

