Mardaani Interesting Facts: फिल्म ‘मर्दानी-3’ के बीच जानिए भारत की असली ‘मर्दानी’ कौन थीं
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इन दिनों रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी-3’ को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। फिल्म रिलीज होते ही गूगल ट्रेंड्स से लेकर सोशल प्लेटफॉर्म्स तक छाई हुई है। दमदार कहानी, सशक्त महिला किरदार और रियलिस्टिक कॉप ड्रामा के चलते यह फिल्म दर्शकों को खूब पसंद आ रही है। रानी मुखर्जी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह मजबूत महिला किरदारों की पहली पसंद क्यों हैं। लेकिन इसी बीच एक सवाल लोगों के मन में बार-बार उठ रहा है—क्या आप जानते हैं कि भारत की असली यानी रियल लाइफ ‘मर्दानी’ कौन थीं?
भारत की असली मर्दानी कौन थीं?
अगर ‘मर्दानी’ शब्द सुनते ही आपके जहन में वीरता, साहस और निडरता की छवि उभरती है, तो इसका जवाब इतिहास में छिपा है। हिन्दी साहित्य की मशहूर कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की अमर पंक्तियां—
“खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी”
इस सवाल का सबसे सटीक जवाब देती हैं। भारत की असली ‘मर्दानी’ कोई और नहीं, बल्कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई थीं।
रानी लक्ष्मीबाई: साहस और बलिदान की मिसाल
रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 1828 में वाराणसी में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका, जिसे प्यार से ‘मनु’ कहा जाता था। बचपन से ही उन्हें घुड़सवारी, तलवारबाजी और युद्ध कला का प्रशिक्षण मिला। यही वजह थी कि वह आगे चलकर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की सबसे प्रमुख और साहसी नायिकाओं में शामिल हुईं।
जब अंग्रेजों ने झांसी को हड़पने की साजिश रची, तब रानी लक्ष्मीबाई ने साफ शब्दों में ऐलान किया—“मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी।” यह वाक्य आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रेरणादायक नारों में गिना जाता है।
अंग्रेज भी खाते थे रानी से खौफ
रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से अंग्रेज तक थर-थर कांपते थे। उन्होंने मेजर जनरल ह्यूरोज की ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी थी। कहा जाता है कि वह पीठ पर अपने पुत्र को बांधकर, दोनों हाथों में तलवार लिए रणभूमि में उतरती थीं। अंग्रेज अफसरों ने उन्हें “विद्रोहियों में सबसे खतरनाक और एकमात्र मर्द” तक कहा था।
वीरगति के साथ अमर हो गईं
1858 में ग्वालियर के पास युद्ध करते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, लेकिन उन्होंने अंतिम सांस तक अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके। उनका साहस, बलिदान और आत्मसम्मान आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।
‘मर्दानी’ की असली परिभाषा
आज भले ही ‘मर्दानी-3’ जैसी फिल्में सशक्त महिला किरदारों को पर्दे पर दिखा रही हों, लेकिन भारत की असली मर्दानी सदियों पहले इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ चुकी हैं। रानी लक्ष्मीबाई सिर्फ एक योद्धा नहीं, बल्कि नारी शक्ति, साहस और स्वाभिमान की प्रतीक थीं।

