बीकानेरी नमकीन उद्योग पर अंतरराष्ट्रीय संकट का असर, निर्यात और आयात दोनों प्रभावित
बीकानेर, जो अपने प्रसिद्ध भुजिया, पापड़ और नमकीन उत्पादों के लिए देश-विदेश में जाना जाता है, अब वैश्विक संकट का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, खासकर Israel Iran War का सीधा असर अब बीकानेर के नमकीन उद्योग पर भी देखने को मिल रहा है। इस संघर्ष के कारण निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हुए हैं, जिससे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
खाड़ी देशों में बढ़ी मांग, लेकिन सप्लाई में दिक्कत
अरब देशों और यूरोप में बीकानेरी नमकीन और मसालों की मांग पहले की तरह बनी हुई है। हालांकि, सप्लाई चेन में आई बाधाओं के कारण समय पर माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बीकानेर से हर महीने बड़ी संख्या में कंटेनर विदेश भेजे जाते हैं, लेकिन अब देरी और लागत में बढ़ोतरी व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
ढुलाई और कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी
भीखाराम ग्रुप से जुड़े कारोबारी आशीष अग्रवाल के अनुसार, युद्ध के चलते माल भाड़े में भारी वृद्धि हुई है। इसके अलावा कच्चे माल की कीमतों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले एक महीने में खाद्य तेल की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ा है।
पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण पैकेजिंग लागत भी 30-40 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जिससे कुल उत्पादन खर्च और अधिक हो गया है।
शिपमेंट में देरी और लंबा ट्रांजिट टाइम
निर्यातकों के अनुसार, पहले जो माल लगभग 30 दिनों में अपने गंतव्य तक पहुंच जाता था, अब वही शिपमेंट 60 दिनों तक का समय ले रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि युद्ध के चलते कंटेनरों को लंबे और सुरक्षित मार्गों से भेजा जा रहा है। इससे समय और लागत दोनों बढ़ रहे हैं।
आयात-निर्यात दोनों पर असर
बीकानेर के निर्यातक राजेश जिंदल ने बताया कि आने और जाने वाले दोनों प्रकार के माल में देरी हो रही है। पाम ऑयल, सोयाबीन और अन्य कच्चे माल के आयात पर भी इसका असर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि, “अरब देशों में बीकानेरी नमकीन और मसालों की मांग अभी भी अधिक है, लेकिन आपूर्ति में बाधा आने से नुकसान हो रहा है।” इस स्थिति के कारण व्यापारियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
करोड़ों रुपये का माल रास्ते में अटका
उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, बीकानेर से हर महीने 15 से 20 कंटेनर भुजिया, पापड़ और नमकीन का निर्यात किया जाता है। इसके अलावा अन्य उत्पादों के लगभग 60 कंटेनर भी विदेश भेजे जाते हैं।
फिलहाल, करोड़ों रुपये का माल या तो बंदरगाहों पर अटका हुआ है या रास्ते में फंसा हुआ है। व्यापारियों को इस अनिश्चितता के कारण अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।
मांग बनी हुई, लेकिन चुनौती बढ़ी
बीकानेरी नमकीन की अंतरराष्ट्रीय मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटें उद्योग के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि हालात सामान्य होने पर निर्यात फिर से गति पकड़ सकता है।
निष्कर्ष
Bikaner का नमकीन उद्योग वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और बढ़ती लागत ने इस उद्योग के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती, तो आने वाले समय में इस उद्योग को और भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

