4 Feb 2026, Wed

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने प्लानिंग के साथ किया अटैक, घिरी पाकिस्तानी सेना; हर मोर्चे पर मिली शिकस्त

बलूच लिबरेशन आर्मी का ऑपरेशन हेरोफ 2.0: पाकिस्तानी सेना पर coordinated हमले

बलूचिस्तान, पाकिस्तान: बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक बार फिर ऑपरेशन हेरोफ 2.0 के तहत पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर हमला किया। BLA का दावा है कि यह अभियान पूरी योजना के साथ किया गया, जिसका उद्देश्य बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी को चुनौती देना और स्थानीय जनता के अधिकारों की रक्षा करना है। संगठन ने कहा कि उसने पहाड़ी और दुर्गम इलाकों का लाभ उठाते हुए सेना की गतिविधियों पर नजर रखी और कई इलाकों में घातक हमले किए।

हमले क्वेटा, ग्वादर, मस्तुंग, नोशकी, दलबंदिन, खारान, पंजगुर, टुम्ब और पसनी जैसे क्षेत्रों में किए गए। BLA का दावा है कि सुरक्षा बलों की आवाजाही को बाधित करने के लिए सड़कें ब्लॉक की गईं, वाहनों में आग लगाई गई और कई जगहों पर पुलिस चौकियों, सरकारी कार्यालयों, बाजारों और बैंक पर हमला किया गया। कई कैदियों को केंद्रीय जेल से रिहा किया गया।

BLA के प्रवक्ता जीयांद बलूच ने कहा कि ऑपरेशन का एक हिस्सा सफलतापूर्वक पूरा हो गया है और कुछ इलाके अब भी लड़ाई के दायरे में हैं। संगठन ने दावा किया कि हमलों में 200 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कम से कम 17 लोग पकड़े गए। इस ऑपरेशन में महिला आत्मघाती हमलावरों का भी इस्तेमाल किया गया।

हाल के वर्षों में BLA ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। हमले अब बार-बार, समन्वित और पहले से अधिक घातक होते जा रहे हैं। 2022 में सेना और नौसेना के ठिकानों पर हमले किए गए थे। अगस्त 2024 में राजमार्गों पर घात लगाकर हमले हुए और मार्च 2025 में रेलवे पटरियों और यात्री ट्रेनों को निशाना बनाया गया।

BLA का यह अभियान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) परियोजनाओं और संसाधनों के शोषण के खिलाफ भी है। बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद पाकिस्तान का सबसे गरीब प्रांत बना हुआ है। स्थानीय लोग विकास की कमी, अन्याय और सेना की कार्रवाई से परेशान हैं। यही कारण है कि BLA ने हमलों को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि BLA की यह रणनीति पाकिस्तानी सेना के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। बलूचिस्तान में लगातार हमले और विद्रोह यह दर्शाते हैं कि स्थानीय grievances का समाधान किए बिना स्थायी शांति की संभावना कम है।

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