18 Feb 2026, Wed

फैटी लिवर एक स्प्रे से होगा ठीक! IIT कानपुर ने खोजा लिवर में जमा फैट को निकालने का तरीका, जानें कितने दिन में होगा असर

IIT कानपुर ने विकसित किया फैटी लिवर का स्प्रे, मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण

भारत में फैटी लिवर (Fatty Liver) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर तीसरा भारतीय इस बीमारी से प्रभावित है। फैटी लिवर न केवल लिवर की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य गंभीर जटिलताओं का भी कारण बन सकता है। अब तक फैटी लिवर के लिए कोई प्रभावी दवा मौजूद नहीं थी, और मरीज केवल जीवनशैली सुधार, व्यायाम और खान-पान पर निर्भर रहते थे।

लेकिन अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने इस दिशा में क्रांतिकारी सफलता हासिल की है। IIT कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अशोक कुमार और उनकी टीम ने एक स्प्रे-आधारित थेरेपी विकसित की है, जो फैटी लिवर और आंत संबंधी बीमारियों के इलाज में प्रभावी साबित हो सकती है। यह थेरेपी Regenerative Medicine की श्रेणी में आती है और लिवर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को नया जीवन देने में सक्षम बताई जा रही है।

स्प्रे कैसे काम करता है

प्रोफेसर अशोक कुमार के अनुसार, यह स्प्रे स्वस्थ कोशिकाओं से प्राप्त एक्सोजोम्स (Exosomes) को विशेष पॉलिमर सॉल्यूशन में मिलाकर तैयार किया जाता है। लेप्रोस्कोपिक (minimally invasive) तकनीक के जरिए लिवर में स्प्रे किया जाता है। शरीर में पहुंचते ही यह तरल जैल में बदल जाता है और क्षतिग्रस्त लिवर कोशिकाओं को रिपेयर करता है। इसके साथ ही फैट जमा होने की प्रक्रिया रुकती है और लिवर नए जैसा स्वस्थ बनने लगता है।

प्रारंभिक परीक्षण चूहों पर किए गए हैं, जहां स्प्रे के इस्तेमाल से फैटी लिवर पूरी तरह सामान्य हो गया। टीम ने दावा किया कि स्प्रे का असर एक हफ्ते में दिखना शुरू हो जाता है और 2-3 महीनों में लिवर पूरी तरह रिकवर हो सकता है।

क्लीनिकल ट्रायल और उपलब्धता

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इस स्प्रे पर मानव परीक्षण (Clinical Trials) की अनुमति दे दी है। ट्रायल्स एक-दो साल में पूरे होने की संभावना है, और इसके सफल होने के बाद यह उत्पाद आम मरीजों के लिए उपलब्ध होगा।

लागत और मरीजों के लिए लाभ

प्रोफेसर अशोक कुमार ने बताया कि यह स्प्रे प्राकृतिक पॉलिमर से बना है, जो भारत में ही उत्पादित होता है। इसका मतलब है कि यह सुलभ और किफायती होगा। इस स्प्रे के सफल परीक्षण के बाद लाखों भारतीय मरीजों के लिए फैटी लिवर का इलाज संभव हो सकेगा और यह लिवर रिजनरेशन और मिनिमली इनवेसिव ट्रीटमेंट के क्षेत्र में भारत की वैज्ञानिक क्षमता को भी दर्शाता है।

फैटी लिवर स्प्रे न केवल लिवर को नया जीवन देगा, बल्कि भविष्य में अन्य अंगों की रिजनरेटिव दवाओं के लिए भी आधार बन सकता है।

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