पूर्वोत्तर भारत में रेल कनेक्टिविटी को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। सैरांग–सिलचर नई ट्रेन सेवा की शुरुआत के साथ ही मिजोरम और असम के बीच यात्रा अब तेज, आसान और भरोसेमंद हो गई है। इस ऐतिहासिक ट्रेन सेवा को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मिजोरम और असम का नया रेल लिंक
सैरांग स्टेशन, जो मिजोरम की राजधानी आइजोल के पास स्थित है, अब असम के सिलचर से सीधे जुड़ गया है। इससे पहले इन दोनों राज्यों के बीच यात्रा के लिए यात्रियों को कठिन पहाड़ी रास्तों और लंबी यात्रा का सामना करना पड़ता था। नई ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल एक नई ट्रेन सेवा नहीं, बल्कि मिजोरम और पूर्वोत्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
स्थानीय लोगों को फायदे
नई ट्रेन सेवा के शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को कई तरह के लाभ मिलेंगे:
स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार: मिजोरम के गंभीर मरीज अब असम के बेहतर अस्पतालों जैसे सिलचर मेडिकल कॉलेज तक आसानी से पहुंच पाएंगे।
शिक्षा के अवसर: छात्रों के लिए दूसरे राज्य के शिक्षण संस्थानों तक सुरक्षित और सस्ता सफर संभव होगा।
व्यापार में गति: आवश्यक वस्तुओं और स्थानीय कृषि उत्पादों जैसे अनानास और अदरक की आपूर्ति तेज होगी, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
गुवाहाटी स्टेशन का कायाकल्प
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने असम के प्रमुख रेलवे स्टेशन गुवाहाटी का भी आधुनिकीकरण किया। नई सुविधाओं में आधुनिक वेटिंग एरिया, सूचना केंद्र और यात्रियों के ठहरने के बेहतर इंतजाम शामिल हैं। यह कदम पूर्वोत्तर में आने वाले पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाएगा।
पूर्वोत्तर विकास में बड़ा योगदान
सैरांग–सिलचर रेल सेवा और गुवाहाटी स्टेशन की नई सुविधाएं यह स्पष्ट करती हैं कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ने में पूरी तरह जुटी हुई है। इस परियोजना से क्षेत्र का सामाजिक, आर्थिक और बुनियादी ढांचे का विकास तेज होगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह नई ट्रेन सेवा मिजोरम और असम के बीच सड़क यात्रा पर निर्भरता कम करेगी और लंबी दूरी की यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाएगी। साथ ही, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में भी इसका सकारात्मक असर दिखेगा।
सैरांग–सिलचर रेल कनेक्शन से न केवल यात्रियों को लाभ मिलेगा, बल्कि यह पूर्वोत्तर में रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस रूट पर और ट्रेन सेवाओं का विस्तार किया जा सकता है।
यह परियोजना पूर्वोत्तर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी और मिजोरम-असम सहित पूरे क्षेत्र को देश के मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने में मदद करेगी।

