26 Feb 2026, Thu

पीएम मोदी की इजराइल यात्रा पर बजी 90 साल पुरानी धुन, देशभर की मॉर्निंग अलॉर्म थी कभी ये रेडियो ट्यून

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इजराइल के दौरे पर पहुंचे, जहां उनका स्वागत इस देश की एक ऐतिहासिक धुन के साथ हुआ। इस यात्रा के दौरान भारत और इजराइल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की बातचीत होगी। पीएम मोदी इजराइल आए हैं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर और यह उनका साल 2017 के बाद दूसरा दौरा है।

इजराइल के तेल अवीव एयरपोर्ट पर पीएम मोदी के स्वागत के दौरान बजाई गई धुन ने सभी का ध्यान खींचा। यह धुन 90 साल पुरानी है और भारतीय रेडियो पर लंबी अवधि तक सुबह की अलार्म ट्यून के रूप में बजती रही। इसे इजराइल के एक संगीतकार ने कंपोज किया था। इसकी खास बात यह है कि इस धुन का भारत से भी गहरा नाता है। करीब 50 साल तक यह धुन पूरे देश में लोकप्रिय रही और लोगों के जीवन का हिस्सा बन गई।

इस धुन के रचनाकार थे वॉल्टर कॉफमैन, जो चेक नागरिक थे और ऑल इंडिया रेडियो में संगीत निर्देशक के रूप में कार्यरत थे। वे नाजियों से बचने के लिए भारत आए और फरवरी 1934 में मुंबई पहुंचे। भारत में उनके योगदान का असर तत्काल दिखाई दिया। उन्होंने बॉम्बे चैंबर म्यूज़िक सोसाइटी की स्थापना की, जो विलिंगडन जिमखाना में हर गुरुवार को संगीत प्रस्तुतियां देती थी। मई 1937 तक इस सोसाइटी ने पुराने और आधुनिक संगीतकारों की 136 प्रस्तुतियां दीं।

वॉल्टर कॉफमैन का जन्म 1907 में पूर्व चेकोस्लोवाकिया के कार्ल्सबाद में हुआ था। 1930 में उन्होंने बर्लिन के स्टेटलिच होचशूले फर म्यूजिक से स्नातक की डिग्री हासिल की और प्राग स्थित जर्मन विश्वविद्यालय में संगीतशास्त्र में पीएचडी की पढ़ाई शुरू की। हालांकि जब उन्हें पता चला कि उनके शिक्षक, गुस्ताव बेकिंग, नाजी युवा समूह के नेता थे, तो उन्होंने पीएचडी पूरी करने से इनकार कर दिया। 1927 से 1933 तक उन्होंने बर्लिन, कार्ल्सबाद और एगर में ग्रीष्मकालीन ओपेरा कार्यक्रमों का संचालन किया।

कॉफमैन ने भारत में रहते हुए संगीत और सांस्कृतिक क्षेत्र में कई योगदान दिए। उनके प्रयासों ने भारतीय संगीत प्रेमियों को पश्चिमी और क्लासिकल संगीत से परिचित कराया। उनका संगीत भारतीय और इजराइली संस्कृति को जोड़ने का माध्यम भी बना। उनकी रचनाएं न केवल संगीत की दृष्टि से महत्वपूर्ण थीं, बल्कि इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी याद की जाती हैं।

प्रधान मंत्री मोदी के स्वागत के दौरान यह धुन बजाना इसलिए भी खास था क्योंकि यह भारत और इजराइल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को दर्शाता है। कॉफमैन ने भारत में रहकर संगीत के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह आज भी याद किया जाता है। उनकी धुनों ने भारत में रेडियो संस्कृति को आकार दिया और कई पीढ़ियों के लिए सुबह की शुरुआत का हिस्सा बनी।

पीएम मोदी का यह दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक स्वागत ने इस यात्रा की विशेषता को और बढ़ा दिया।

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