Pakistan-Afghanistan Conflict: कंधार एयरपोर्ट के पास फ्यूल डिपो पर हमले का दावा, बढ़ा दोनों देशों के बीच तनाव
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव अब और अधिक गहरा होता दिखाई दे रहा है। हालिया घटनाओं के बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने दावा किया है कि पाकिस्तान वायुसेना ने कंधार एयरपोर्ट के पास स्थित एक प्राइवेट एयरलाइन के फ्यूल डिपो को निशाना बनाया है। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है।
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पाकिस्तान एयर फोर्स ने कंधार एयरपोर्ट के पास मौजूद कम एयर (Kam Air) के ईंधन भंडार पर हमला किया। उनके अनुसार यह ईंधन डिपो केवल घरेलू उड़ानों के लिए ही नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र के विमानों को भी ईंधन उपलब्ध कराता है। मुजाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान इससे पहले भी एक राष्ट्रीय व्यापारी हाजी खान जदाह के ईंधन भंडार को निशाना बना चुका है।
इन आरोपों के बीच सीमा पर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के अलीशेर-तेरेजाई इलाके में, जो कथित डूरंड लाइन के पास स्थित है, तोपों से भारी गोलाबारी की। इस गोलाबारी में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर भी भय और अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है।
दरअसल फरवरी महीने से ही डूरंड लाइन के आसपास दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी दौरान पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान की राजधानी काबुल समेत कई शहरों में हवाई हमलों की खबरें भी सामने आई थीं। 27 फरवरी को पाकिस्तान ने काबुल और अन्य अफगान शहरों पर एयरस्ट्राइक करने का दावा किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस स्थिति को ‘खुली जंग’ करार दिया है। उन्होंने तालिबान सरकार पर आरोप लगाया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों को शरण देने और उग्रवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी समूह उसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं।
वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि 26 फरवरी को डूरंड लाइन के पास हुई जवाबी कार्रवाई में अफगान बलों ने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का मुख्य कारण डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। इसके अलावा 2021 में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में वापस आने के बाद दोनों देशों के संबंधों में लगातार खटास बढ़ी है।
पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे आतंकी संगठनों को सुरक्षित पनाह मिल रही है। टीटीपी का गठन 2007 में पाकिस्तान में हुआ था और इसे अफगान तालिबान से अलग संगठन माना जाता है, हालांकि दोनों के बीच वैचारिक और सामाजिक संबंधों की चर्चा अक्सर होती रहती है।
हाल के वर्षों में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के हमलों में तेजी देखी गई है। ऐसे में सीमा पार बढ़ता यह सैन्य तनाव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

