22 Mar 2026, Sun

पाकिस्तानी कोर्ट ने तोशाखाना मामले में सुनाई सजा, इमरान खान और उनकी पत्नी को 17 साल की जेल

इस्लामाबाद, पाकिस्तान। पाकिस्तान की विशेष जवाबदेही अदालत ने शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को तोशाखाना-2 भ्रष्टाचार मामले में 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई। यह मामला 2021 में सऊदी अरब से प्राप्त सरकारी उपहारों में कथित धोखाधड़ी से जुड़ा है।

अदालत का फैसला

रावलपिंडी की उच्च सुरक्षा वाली अदियाला जेल में सुनाए गए फैसले में अदालत ने कहा कि इमरान खान और उनकी पत्नी को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत 10-10 साल और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सात-सात साल की सजा दी गई। इसके अलावा अदालत ने दोनों पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया।

विरोध और गिरफ्तारी

हाल ही में पाकिस्तान पुलिस ने अदियाला जेल के बाहर इमरान खान के समर्थकों और बहनों के खिलाफ मामला दर्ज किया। जेल प्रशासन ने खान से मिलने के लिए रिश्तेदारों और वकीलों को अनुमति नहीं दी, जिसके बाद उनके समर्थकों और बहनों ने जेल के बाहर प्रदर्शन किया। इस पर पुलिस ने आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत अलीमा खान, नोरीन नियाजी और पीटीआई नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की।

इमरान खान की प्रतिक्रिया

जेल में बंद इमरान खान ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर की नीतियां पाकिस्तान के लिए विनाशकारी हैं और उनके कारण आतंकवाद नियंत्रण से बाहर हो गया है। खान ने एक्स पर लिखा कि मुनीर केवल पश्चिमी ताकतों को खुश करने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुनीर ने अफगानिस्तान के साथ जानबूझकर तनाव बढ़ाया, पाकिस्तान में ड्रोन हमले और सैन्य अभियान कराए, जिससे आतंकवाद को बढ़ावा मिला। खान ने कहा कि यह सब राष्ट्रीय हितों के खिलाफ किया जा रहा है, और यह देश के लिए गंभीर संकट का कारण बन रहा है।

मामले का राजनीतिक प्रभाव

तोशाखाना-2 मामले में यह फैसला पाकिस्तान की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर सकता है। इमरान खान के समर्थक इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि अदालत का निर्णय कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से पीटीआई और इमरान खान की राजनीतिक स्थिति प्रभावित होगी और आगामी चुनावों में इसके गहरे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

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