21 Feb 2026, Sat

न प्राण, न अमरीश पुरी, बॉलीवुड के सबसे बड़े विलेन, 61 बार निभाया एक ही किरदार, बार-बार बनते थे नारद मुनि, दादा थे गिलगित के गवर्नर

61 बार एक ही किरदार निभाने वाला बॉलीवुड का अनोखा विलेन: जीवन की दिलचस्प कहानी

मुंबई। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ कलाकार ऐसे हुए हैं, जिन्होंने नायक न होकर भी अपनी अलग और अमिट पहचान बनाई। उन्हीं दिग्गज अभिनेताओं में शामिल हैं जीवन, जिन्होंने पर्दे पर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो आज भी बेमिसाल है। उन्होंने अपने करियर में 61 बार ‘नारद मुनि’ का किरदार निभाया और इस उपलब्धि के लिए उनका नाम Limca Book of Records में दर्ज किया गया।

कश्मीर की रसूखदार फैमिली से बॉलीवुड तक का सफर

जीवन का असली नाम ओमकार नाथ धर था। उनका जन्म कश्मीर के एक संपन्न और प्रभावशाली परिवार में हुआ था। उनके दादा डोगरा शासनकाल में गवर्नर रह चुके थे। परिवार चाहता था कि वे आरामदायक और प्रतिष्ठित जीवन जिएं, लेकिन जीवन ने कला की अनिश्चित राह चुनी।

महज 18 साल की उम्र में वे सिर्फ 26 रुपये लेकर मुंबई आ गए। शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। करीब पांच साल तक उन्होंने तकनीशियन के तौर पर काम किया। आखिरकार 1935 में फिल्म Fashionable India से उनके अभिनय करियर की शुरुआत हुई।

61 बार ‘नारद मुनि’ बनकर बनाया इतिहास

जीवन की सबसे बड़ी पहचान बनी भक्ति फिल्मों में निभाया गया ‘नारद मुनि’ का किरदार। उन्होंने इस भूमिका को इतनी शिद्दत और विशिष्ट अंदाज में निभाया कि वे इस चरित्र के पर्याय बन गए।

करीब 40 साल लंबे करियर में उन्होंने 61 बार नारद मुनि की भूमिका निभाई, जो अपने आप में एक अनोखा कीर्तिमान है। धार्मिक फिल्मों में उनकी मौजूदगी सफलता की गारंटी मानी जाती थी।

50-60 के दशक का खूंखार विलेन

धार्मिक किरदारों के साथ-साथ जीवन ने 50 और 60 के दशक में खलनायक के रूप में भी जबरदस्त पहचान बनाई। मेला, नागिन, नया दौर और कोहिनूर जैसी फिल्मों में उनके नेगेटिव किरदारों ने दर्शकों के दिलों में उनके प्रति असली गुस्सा पैदा कर दिया था।

एक बार तो उनके अभिनय का असर इतना ज्यादा हुआ कि एक महिला ने उन्हें देखकर गुस्से में चप्पल तक फेंक दी थी। यह घटना बताती है कि वे अपने किरदारों को कितनी जीवंतता से निभाते थे। उस दौर में फिल्मों के पोस्टर पर हीरो के साथ उनका चेहरा भी प्रमुखता से छपता था, जो किसी भी खलनायक के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी।

चरित्र भूमिकाओं में भी छोड़ी छाप

70 के दशक में जीवन ने चरित्र भूमिकाएं निभानी शुरू कीं। अमर अकबर एंथनी में रॉबर्ट का किरदार हो या लावारिस, नसीब और सुहाग जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने हर भूमिका को यादगार बना दिया।

अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले इस महान अभिनेता का 1987 में 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके बेटे किरण कुमार ने भी अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।

जीवन आज भी हिंदी सिनेमा में उस अभिनेता के रूप में याद किए जाते हैं, जिन्होंने खलनायक को भी स्टारडम दिलाया और एक ही किरदार को 61 बार निभाकर इतिहास रच दिया।

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