28 Mar 2026, Sat

नारी शक्ति वंदन अधिनियम में होगा संशोधन, मई में 2 दिन के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाएगी सरकार

महिलाओं को 33% आरक्षण देने की तैयारी तेज, मई में संसद का विशेष सत्र बुलाएगी सरकार

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए Nari Shakti Vandan Adhiniyam को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। जानकारी के मुताबिक, सरकार इस कानून में जरूरी संशोधन करने के लिए मई महीने में संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस विशेष सत्र में संशोधित विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। वर्तमान बजट सत्र 2 अप्रैल को समाप्त होने वाला है और उससे पहले सरकार संसद में इस विशेष सत्र की आधिकारिक घोषणा कर सकती है।

गौरतलब है कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam को वर्ष 2023 में पारित किया गया था, जिसे महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की ऐतिहासिक पहल माना गया था। हालांकि, इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जिसके चलते इसे लागू होने में समय लग रहा है। अब सरकार इस दिशा में तेजी लाकर इसे जल्द प्रभावी बनाने की योजना पर काम कर रही है।

सरकार के इस कदम को आगामी चुनावों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। यदि यह संशोधन पारित हो जाता है, तो देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी और नीति निर्माण में उनकी भूमिका मजबूत होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर परिवर्तनकारी साबित हो सकती है। लंबे समय से महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की मांग उठती रही है, और यह कानून उस दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी कई मंचों से महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताया है। उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी कई योजनाएं चलाई हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। अब राजनीतिक क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास तेज होते दिख रहे हैं।

हालांकि, विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट समयसीमा और क्रियान्वयन की रणनीति की मांग कर सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक इस कानून का पूर्ण लाभ मिल पाना चुनौतीपूर्ण रहेगा।

फिलहाल, मई में प्रस्तावित विशेष सत्र पर सभी की नजरें टिकी हैं। अगर यह विधेयक संशोधन के साथ पारित होता है, तो यह भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाई देने वाला ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।

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