7 Apr 2026, Tue

धनबाद में सांसद-मेयर की जंग रेलवे तक: 3 दिन पहले भेजा न्योता, 3 घंटे पहले ‘कैंसिल’, बैनर तक बदल दिए

Dhanbad Politics: सांसद-मेयर विवाद से गरमाई सियासत, बीजेपी में अंदरूनी खींचतान तेज

झारखंड के धनबाद में राजनीतिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। सांसद और मेयर के बीच जारी खींचतान अब रेलवे कार्यक्रम तक पहुंच गई है, जिससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। यह विवाद धनबाद के साथ-साथ पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

आमंत्रण से लेकर रद्द होने तक का घटनाक्रम

धनबाद रेलवे स्टेशन पर नई ट्रेन के उद्घाटन समारोह में स्थानीय नेताओं को आमंत्रित किया गया था। शुरुआत में धनबाद के मेयर संजीव सिंह और झरिया विधायक रागिनी सिंह को भी आमंत्रण भेजा गया था। लेकिन उद्घाटन से महज कुछ घंटे पहले उनका निमंत्रण अचानक रद्द कर दिया गया।

इसके बाद एक और विवाद सामने आया जब कार्यक्रम स्थल पर लगे बैनर से मेयर और विधायक का नाम भी हटा दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

मेयर का तीखा रुख

मेयर संजीव सिंह ने इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी जताई है और इसे एक राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किसके इशारे पर जिले के प्रथम नागरिक को कार्यक्रम से दूर रखा गया। मेयर का कहना है कि उन्हें पहले बुलाया गया और फिर अचानक निमंत्रण रद्द कर दिया गया, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है।

बीजेपी के लिए बढ़ी मुश्किलें

इस विवाद ने बीजेपी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पार्टी के अंदर चल रही खींचतान अब सार्वजनिक रूप से सामने आ रही है, जिससे संगठन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के विवादों से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

बंगाल चुनाव पर असर की आशंका

धनबाद, पश्चिम बंगाल से सटा हुआ क्षेत्र है, इसलिए यहां की राजनीति का असर बंगाल पर भी पड़ सकता है। विपक्षी दल इस विवाद को एक बड़ा मुद्दा बनाकर 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी पर हमला करने की रणनीति बना सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे को बीजेपी की अंदरूनी कलह के रूप में पेश कर रहे हैं।

रेलवे का पक्ष

रेलवे की ओर से सफाई दी गई है कि आमंत्रण में प्राथमिकता सांसद और विधायकों को दी जाती है। हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि जब पहले मेयर और विधायक के नाम शामिल किए गए थे, तो बाद में उन्हें क्यों हटाया गया। इस सवाल ने पूरे मामले को और भी जटिल बना दिया है।

राजनीतिक तापमान चरम पर

इस पूरे विवाद ने धनबाद की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे की चर्चा हो रही है। लोग इसे बीजेपी के अंदरूनी संघर्ष और राजनीतिक शक्ति संतुलन की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं।

निष्कर्ष

धनबाद में शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक गलियारों से होते हुए चुनावी रणनीतियों तक पहुंच सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस स्थिति को कैसे संभालती है और क्या यह विवाद पश्चिम बंगाल चुनावों को भी प्रभावित करेगा या नहीं।

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