Sanae Takaichi फिर बनेंगी जापान की प्रधानमंत्री, चीन के साथ बढ़ सकता है तनाव
टोक्यो: जापान की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। साने तकाइची आज बुधवार को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगी। संसद द्वारा औपचारिक नियुक्ति के बाद वह अपना नया मंत्रिमंडल गठित करेंगी। पिछले हफ्ते हुए चुनाव में उन्होंने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर मजबूत वापसी की है। उनके दोबारा सत्ता में आने से क्षेत्रीय राजनीति, खासकर चीन के साथ संबंधों में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
तकाइची अपनी सख्त राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान रक्षा खर्च बढ़ाने, सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने और पारंपरिक सामाजिक नीतियों को आगे बढ़ाने का संकेत दिया था। अब भारी जनादेश मिलने के बाद वे इन एजेंडों को तेज़ी से लागू करने की कोशिश कर सकती हैं।
दो-तिहाई बहुमत से मजबूत स्थिति
तकाइची की पार्टी Liberal Democratic Party (एलडीपी) को 465 सदस्यीय निचले सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल है। जापान की संसदीय व्यवस्था में यह बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बहुमत के दम पर पार्टी निचले सदन की प्रमुख समितियों में नियंत्रण रख सकती है और ऊपरी सदन में अटके विधेयकों को भी दोबारा पारित कर सकती है। हालांकि ऊपरी सदन में एलडीपी-नेतृत्व वाले गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है।
तकाइची सैन्य शक्ति में वृद्धि, हथियारों के निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील और यूएस-निर्मित युद्धोत्तर शांतिवादी संविधान में संशोधन की पक्षधर रही हैं। हालांकि फिलहाल उन्हें बढ़ती महंगाई, घटती आबादी और आर्थिक सुस्ती जैसी घरेलू चुनौतियों से निपटना होगा।
महंगाई और अर्थव्यवस्था बड़ी चुनौती
जापान में बढ़ती कीमतें और सुस्त वेतन वृद्धि तकाइची सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती मानी जा रही है। उन्होंने खाद्य उत्पादों पर दो साल के लिए बिक्री कर में कटौती का प्रस्ताव दिया है ताकि आम जनता को राहत मिल सके। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक सरकारी खर्च से जापान के पहले से बड़े राष्ट्रीय ऋण पर और दबाव बढ़ सकता है।
ट्रंप से मुलाकात और अमेरिका संबंध
शपथग्रहण के बाद तकाइची अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात की तैयारी कर रही हैं। ट्रंप ने चुनाव से पहले तकाइची का समर्थन किया था। हाल ही में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने घोषणा की कि जापान अमेरिका में 550 अरब डॉलर के निवेश पैकेज के तहत तीन परियोजनाओं में पूंजी लगाएगा। इसमें ओहियो में प्राकृतिक गैस संयंत्र और गल्फ कोस्ट ऑयल निर्यात सुविधा जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। जापान पर रक्षा खर्च बढ़ाने का भी दबाव है।
चीन के खिलाफ सख्त रुख
तकाइची चीन को लेकर अपने कड़े बयानों के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने पहले संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है तो जापान भी हस्तक्षेप कर सकता है। इस बयान पर बीजिंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। चुनावी जीत के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि तकाइची चीन के खिलाफ और सख्त रुख अपना सकती हैं।
उन्होंने टोक्यो के विवादास्पद यासुकुनी श्राइन की यात्रा के लिए भी समर्थन जुटाने की बात कही है, जिसे जापान के पड़ोसी देश युद्धकालीन अतीत से जुड़े प्रतीक के रूप में देखते हैं। इसके अलावा, जापान परमाणु-संचालित पनडुब्बी विकसित करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।
साफ है कि साने तकाइची का दूसरा कार्यकाल जापान की घरेलू और विदेशी नीति में बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है। आने वाले महीनों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

