14 Mar 2026, Sat

तेल संकट के बीच अमेरिका का यू-टर्न! ट्रंप सरकार ने समंदर में फंसे रूसी तेल को खरीदने की दी हरी झंडी

अमेरिका ने रूसी तेल पर अस्थायी छूट दी, बढ़ती तेल कीमतों पर लगाम लगाने की कोशिश

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने कुछ देशों को अस्थायी रूप से रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने का फैसला किया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहे और सप्लाई में गिरावट आए।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की कि वह एक अस्थायी लाइसेंस जारी कर रहा है, जिसके तहत कुछ प्रतिबंधित रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डिलीवरी और बिक्री की अनुमति दी जाएगी। यह अनुमति सीमित समय के लिए है और इसका उद्देश्य ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाना और कीमतों में अस्थिरता को कम करना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण है जब ईरान के साथ तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा जोखिम बढ़ रहे हैं। इन घटनाओं के कारण तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।

अमेरिका ने पहले भी भारत को 30 दिनों के लिए रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी थी। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण कई देशों के लिए रूसी तेल खरीदना मुश्किल हो गया था। लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए अमेरिकी प्रशासन ने सीमित छूट देने का फैसला किया, ताकि ग्लोबल मार्केट में सप्लाई बनी रहे और तेल की कीमतें अत्यधिक बढ़ें।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता बनाए रखने और बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल उन तेल शिपमेंट्स पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में ट्रांजिट में हैं। इसका मतलब है कि रूस को इससे अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं होगा क्योंकि उसकी अधिकांश आय तेल के उत्पादन के समय लगने वाले टैक्स से आती है।

विश्लेषकों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो तेल की कीमतों में और तेजी सकती है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम ग्लोबल एनर्जी मार्केट को स्थिर करने और तेल संकट को काबू में रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अलावा, अन्य वैश्विक खिलाड़ी जैसे चीन और यूरोप भी तेल की आपूर्ति और कीमतों पर नजर बनाए हुए हैं। चीन ने अपनी रणनीति के तहत बड़े पेट्रोलियम भंडार तैयार कर रखे हैं, जिससे उसे वैश्विक तेल संकट का सामना करने में मदद मिल रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए आईईए (इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी) ने भी 40 करोड़ बैरल तेल का रिलीफ स्टॉक खोलने की तैयारी की है। इस तरह के कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने और तेल संकट के संभावित प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।

संक्षेप में, अमेरिका की यह अस्थायी छूट नीति मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों और ग्लोबल तेल कीमतों में उछाल के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई में गिरावट रोकी जा सकती है और तेल की कीमतों में अत्यधिक उछाल को नियंत्रित किया जा सकता है।

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