15 Feb 2026, Sun

डिब्रूगढ़ के नेशनल हाइवे पर हरक्यूलस विमान से उतरे पीएम मोदी, चीन बॉर्डर के पास फाइटर जेट ने भरी उड़ान

यह इमरजेंसी लैंडिंग सुविधा राष्ट्रीय राजमार्ग-127 के डिब्रूगढ़-मोरान खंड पर 4.2 किलोमीटर लंबे प्रबलित कंक्रीट क्षेत्र में विकसित की गई है। इसे भारतीय वायुसेना के समन्वय से तैयार किया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर यहां से उड़ान भर सकें। पूर्वोत्तर में इस तरह की यह पहली दोहरे उपयोग वाली हवाई पट्टी है।

डिब्रूगढ़ से भारत-चीन सीमा (अरुणाचल प्रदेश क्षेत्र में मैकमोहन लाइन/LAC) की दूरी लगभग 250-300 किलोमीटर है। ऐसे में यह एयरस्ट्रिप सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आपात स्थिति, प्राकृतिक आपदा या सैन्य जरूरत के समय यह सुविधा निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

वायुसेना का शानदार हवाई प्रदर्शन

उद्घाटन के दौरान भारतीय वायुसेना के विमानों ने हाईवे से उड़ान भरते हुए आसमान में शानदार प्रदर्शन किया। लड़ाकू जेट, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टरों की गर्जना ने उपस्थित लोगों का उत्साह बढ़ा दिया। यह प्रदर्शन भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं का स्पष्ट संकेत था।

मुख्यमंत्री ने जताया आभार

असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने इस परियोजना को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सुविधा राज्य की कनेक्टिविटी और रणनीतिक मजबूती को नया आयाम देगी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को देश की रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने के लिए धन्यवाद दिया।

5,450 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शुभारंभ

प्रधानमंत्री मोदी अपने असम दौरे के दौरान 5,450 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। डिब्रूगढ़ कार्यक्रम के बाद वे गुवाहाटी जाएंगे, जहां ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु का निरीक्षण करेंगे।

इसके अलावा अमीनगांव में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय डेटा केंद्र का उद्घाटन, आईआईएम गुवाहाटी के नए परिसर का शुभारंभ और पीएम-ईबस सेवा योजना के तहत 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

पूर्वोत्तर के विकास की नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि मोरान इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी न केवल रक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पूर्वोत्तर भारत में बुनियादी ढांचे के विकास का भी प्रतीक है। इससे क्षेत्र में निवेश, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री का यह दौरा पूर्वोत्तर राज्यों को राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

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