बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: ट्रैफिक नियमों के पालन और सिविक सेंस पर दिया जोर, मुआवजा भी बढ़ाया
देश में सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर एक अहम टिप्पणी करते हुए Bombay High Court ने नागरिकों से जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग सिविक सेंस अपनाएं और बिना किसी दबाव के खुद ट्रैफिक नियमों का पालन करें।
‘विदेशों से सीखने की जरूरत’
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Jitendra Jain की एकल पीठ ने कहा कि भारतीय नागरिक जब विदेश जाते हैं, तो वहां के सभी नियमों का पालन करते हैं, लेकिन अपने देश में वही अनुशासन नहीं दिखाते। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर देश में लौटने के बाद लोग अपने ही नियमों का पालन क्यों नहीं करते।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। बड़ों और माता-पिता का कर्तव्य है कि वे नियमों का पालन करें, ताकि आने वाली पीढ़ी उनसे सही आदतें सीखे।
सड़क दुर्घटना के मामले में टिप्पणी
यह टिप्पणी एक सड़क दुर्घटना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की गई। इस मामले में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जब वह सड़क पार कर रहा था और उसे एक बस ने टक्कर मार दी थी। यह मामला Thane में नवंबर 2012 की घटना से जुड़ा है।
पीड़ित व्यक्ति पार्किंसन बीमारी से ग्रस्त था और आंशिक रूप से लकवाग्रस्त भी था। घटना के बाद मार्च 2013 में उसकी मौत हो गई थी।
सिग्नल और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर चिंता
कोर्ट ने कहा कि अक्सर लोग ट्रैफिक सिग्नल की अनदेखी करके सड़क पार करते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं होती हैं और कई बार जान भी चली जाती है। अदालत ने खासतौर पर टू-व्हीलर चालकों की लापरवाही पर भी चिंता जताई।
अदालत ने कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हर व्यक्ति को ट्रैफिक सिग्नल का पालन करना चाहिए और सड़क पार करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
साथ ही, कोर्ट ने कहा कि ट्रैफिक पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन नियम तोड़ने वालों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
मामले में मुआवजे का फैसला
इस केस में मृतक के परिवार ने मुआवजा बढ़ाने की मांग की थी। पहले मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) ने अप्रैल 2016 में परिवार को 13 लाख रुपये का मुआवजा दिया था।
हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले की सभी परिस्थितियों को देखते हुए मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि भले ही मृतक ने कुछ हद तक लापरवाही बरती थी, लेकिन बस चालक को भी सतर्क रहना चाहिए था, खासकर जब सामने एक कमजोर और चलने में असमर्थ व्यक्ति था। चालक को अपनी गति कम करनी चाहिए थी।
जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील
Bombay High Court ने अपने आदेश में साफ कहा कि नागरिकों को सड़क पर अनुशासन बनाए रखना चाहिए और नियमों का पालन करना चाहिए। यह न केवल उनकी अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि दूसरों की जान बचाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
इस मामले के जरिए हाईकोर्ट ने देश में सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। अदालत की यह टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि सुरक्षित और जिम्मेदार समाज के निर्माण के लिए हर नागरिक को सिविक सेंस अपनाना होगा और नियमों का पालन करना होगा।

