इजरायल-ईरान तनाव चरम पर, खर्ग द्वीप पर हमले और क्षेत्र में बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ताजा घटनाक्रम में इजरायली सेना ने ईरान के खर्ग द्वीप पर हमला किया है, जिसे ईरान के तेल निर्यात का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई डेडलाइन समाप्त होने से कुछ ही घंटे पहले हुआ, जिससे क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं।
ईरानी मीडिया आउटलेट मेहर न्यूज के अनुसार, खर्ग द्वीप पर कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि “अमेरिकी-जायोनी दुश्मन” द्वारा एक के बाद एक कई हमले किए गए, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
खर्ग द्वीप, जो ईरान की मुख्य भूमि से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है, देश के तेल निर्यात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस पर हमला होना ईरान की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने तय समय सीमा के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा नहीं खोला, तो उसके अहम बुनियादी ढांचों पर बड़े पैमाने पर बमबारी की जा सकती है। इसमें बिजली संयंत्र, पुल और अन्य रणनीतिक ढांचे शामिल हैं। इस बयान के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और सतर्कता में तेजी आई है।
इजरायल ने भी हाल के दिनों में अपने नागरिकों और यात्रियों को चेतावनी जारी की है। रिपोर्टों के अनुसार, लोगों को ट्रेन यात्रा से बचने की सलाह दी गई है, जिससे संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए एहतियात बरती जा सके।
इससे पहले भी खर्ग द्वीप पर हमले की खबरें सामने आ चुकी हैं। 13 मार्च को ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप पर स्थित ईरान के सैन्य ठिकानों को नष्ट कर दिया है। उन्होंने इसे मध्य पूर्व के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी में से एक बताया था।
इसी बीच, ईरान के भीतर भी सुरक्षा स्थिति बिगड़ती नजर आ रही है। मध्य ईरान के काशान शहर में एक रेलवे पुल पर हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गई। IRNA के अनुसार, इस्फहान प्रांत के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अकबर सालेही ने बताया कि याह्या आबाद रेलवे पुल को निशाना बनाया गया।
लगातार हो रहे इन हमलों और बयानों के कारण क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बनते दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका प्रभाव केवल इन दोनों देशों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल, दोनों देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि और आगे की रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर केंद्रित कर दी हैं।

