Ethanol Policy: ब्रोकन राइस घटाकर बढ़ेगा एथेनॉल उत्पादन, भारत की ऊर्जा रणनीति को मिलेगी मजबूती
भारत में एथेनॉल उत्पादन और इसके उपयोग को लेकर सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी दिशा में केंद्र सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में दिए जाने वाले ब्रोकन राइस की हिस्सेदारी कम करने की तैयारी में है। प्रस्ताव के तहत 1 अप्रैल 2026 से ब्रोकन राइस का अनुपात 25 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया जा सकता है। इस फैसले से एथेनॉल उद्योग को कच्चे माल की स्थिर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होगी, साथ ही देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की एथेनॉल उत्पादन क्षमता 2013-14 में जहां करीब 420 करोड़ लीटर सालाना थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 2000 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है। पिछले तीन वर्षों में ही इसमें करीब 650 करोड़ लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्तमान में भारत में एथेनॉल आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों, विशेष रूप से मक्का और चावल से आता है।
PDS में बड़ा बदलाव प्रस्तावित
सरकार लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराती है, जिसमें ब्रोकन राइस की हिस्सेदारी करीब 25 प्रतिशत रहती है। प्रस्ताव लागू होने के बाद यह हिस्सेदारी घटकर 10 प्रतिशत रह जाएगी। इससे हर साल लगभग 90 लाख टन अतिरिक्त ब्रोकन राइस एथेनॉल उत्पादन के लिए उपलब्ध हो सकेगा। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हाल के हफ्तों में तेज उछाल देखा गया है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग में भारत की प्रगति
भारत ने पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। खाद्य सचिव के अनुसार, 2013 में जहां एथेनॉल ब्लेंडिंग मात्र 1.5 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इस उपलब्धि से देश को अब तक 1.63 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और 2014 से अब तक 2.77 करोड़ मीट्रिक टन कच्चे तेल के आयात में कमी आई है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
सरकार का उद्देश्य केवल एथेनॉल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं है, बल्कि इसकी खपत और उपयोग को भी बढ़ाना है। इसके तहत 20 प्रतिशत से अधिक एथेनॉल ब्लेंडिंग, डीजल में एथेनॉल मिश्रण और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। इन नीतियों का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करना है।
ब्रोकन राइस से मिलेगा स्थिर सप्लाई
अधिकारियों के अनुसार, ब्रोकन राइस की स्थिर उपलब्धता एथेनॉल उद्योग की एक पुरानी समस्या का समाधान कर सकती है। वर्ष 2023 में गन्ना और चावल की कमी के कारण डिस्टिलरीज को कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ा था। जलवायु परिवर्तन और कृषि उत्पादन में उतार-चढ़ाव को देखते हुए एक स्थिर सप्लाई चेन बेहद जरूरी है। ब्रोकन राइस को मुख्य फीडस्टॉक के रूप में उपयोग करने से उद्योग को निरंतर उत्पादन में मदद मिलेगी।
नई व्यवस्था कैसे लागू होगी
नए प्रस्ताव के तहत पीडीएस के माध्यम से वितरित होने वाले 360 से 370 लाख टन अनाज में से अतिरिक्त ब्रोकन राइस को नीलामी के जरिए एथेनॉल निर्माताओं, पशु आहार उद्योग और अन्य सेक्टर्स को बेचा जाएगा। इस व्यवस्था का परीक्षण पहले ही कुछ राज्यों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इसके बाद फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) डिस्टिलरीज को साबुत चावल देने के बजाय ब्रोकन राइस की आपूर्ति को प्राथमिकता देगा।
सरकार ने डिस्टिलरीज से अपील की है कि वे इस वर्ष आवंटित चावल में से शेष स्टॉक को जल्द से जल्द उठाएं, क्योंकि रियायती दर केवल 30 जून 2026 तक ही लागू रहेगी।
निष्कर्ष
भारत की यह नई नीति ऊर्जा सुरक्षा, कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग और एथेनॉल उद्योग को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। ब्रोकन राइस की आपूर्ति को व्यवस्थित कर सरकार न केवल एथेनॉल उत्पादन को स्थिर करना चाहती है, बल्कि देश की तेल आयात निर्भरता को भी कम करना चाहती है।

