देश की प्रमुख आइसक्रीम कंपनी क्वालिटी वॉल्स इंडिया लिमिटेड ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में बतौर स्वतंत्र कंपनी सफल लिस्टिंग की। यह लिस्टिंग कंपनी के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि यह कदम हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के आइसक्रीम बिजनेस से अलग होने के बाद उठाया गया है। डीमर्जर के बाद अब क्वालिटी वॉल्स एक स्वतंत्र और सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी बन चुकी है।
कमजोर शुरुआत, फिर संभला शेयर
हालांकि, शेयर बाजार में कंपनी की एंट्री उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कंपनी के शेयर 29.80 रुपये पर लिस्ट हुए, जो 40.20 रुपये के डिस्कवर्ड प्राइस से करीब 25.87 प्रतिशत कम था। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर शेयर 29.90 रुपये पर सूचीबद्ध हुए, जो 38.15 रुपये के डिस्कवर्ड प्राइस से लगभग 21.6 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
लिस्टिंग के शुरुआती झटके के बाद शेयरों में कुछ रिकवरी देखने को मिली। एनएसई पर शेयर 4.93 प्रतिशत की बढ़त के साथ 31.27 रुपये तक पहुंच गए, जबकि बीएसई पर 4.58 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। बीएसई पर कंपनी का मार्केट कैप 7373.02 करोड़ रुपये और एनएसई पर 7333.07 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
डीमर्जर के बाद नई पहचान
क्वालिटी वॉल्स का यह लिस्टिंग कदम राष्ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण (NCLT) से मंजूरी मिलने के बाद दिसंबर 2025 से प्रभावी हुए डीमर्जर का हिस्सा है। 5 दिसंबर 2025 को तय रिकॉर्ड डेट के अनुसार, हिंदुस्तान यूनिलीवर के प्रत्येक शेयरधारक को उसके हर एक शेयर के बदले क्वालिटी वॉल्स इंडिया लिमिटेड का एक शेयर आवंटित किया गया।
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि स्वतंत्र इकाई के रूप में सूचीबद्ध होना उसके विकास के नए अध्याय की शुरुआत है। इससे कंपनी को रणनीतिक फैसलों में अधिक लचीलापन मिलेगा और आइसक्रीम कारोबार पर केंद्रित विकास की दिशा में काम करने का अवसर मिलेगा।
पैरेंट कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी
क्वालिटी वॉल्स इंडिया लिमिटेड में 61.9 प्रतिशत हिस्सेदारी The Magnum Ice Cream Company के पास है, जो कि यूनिलीवर समूह का हिस्सा रही है। यह कंपनी वैश्विक स्तर पर आइसक्रीम व्यवसाय की प्रमुख इकाई मानी जाती है और अब क्वालिटी वॉल्स की पैरेंट कंपनी बन चुकी है।
इस संरचना से साफ है कि कंपनी को अंतरराष्ट्रीय अनुभव और ब्रांड वैल्यू का लाभ मिलता रहेगा, जबकि संचालन में स्वतंत्रता भी बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आइसक्रीम जैसे मौसमी और तेजी से बढ़ते उपभोक्ता बाजार में फोकस्ड बिजनेस मॉडल कंपनी के लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है।
निवेशकों की नजरें भविष्य पर
हालांकि लिस्टिंग के दिन शेयरों में गिरावट ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क जरूर किया है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का कहना है कि शुरुआती उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। आने वाले तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, ब्रांड रणनीति और विस्तार योजनाओं पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।
कुल मिलाकर, क्वालिटी वॉल्स इंडिया लिमिटेड की यह लिस्टिंग भारतीय एफएमसीजी सेक्टर में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब देखना होगा कि स्वतंत्र इकाई के रूप में कंपनी बाजार में अपनी पकड़ कितनी मजबूत कर पाती है।

