गृह मंत्रालय ने जारी की भारत की पहली व्यापक आतंकवाद-विरोधी नीति ‘प्रहार’
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को भारत की पहली व्यापक आतंकवाद-विरोधी नीति ‘प्रहार’ जारी कर दी। इस नीति का उद्देश्य देश को हवा, पानी और जमीन के जरिए उत्पन्न होने वाले आतंकवादी खतरों से सुरक्षित रखना है। नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत को सीमा पार से आतंकवाद, साइबर हमलों और नई तकनीक जैसे ड्रोन और रोबोटिक्स के दुरुपयोग का खतरा लगातार बना हुआ है।
प्रहार में यह कहा गया है कि आतंकवाद किसी विशिष्ट धर्म, जातीयता या राष्ट्रीयता से नहीं जुड़ा है। हालांकि, भारत लंबे समय से सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद और जिहादी आतंकी संगठनों के हमलों का सामना कर रहा है। अल-कायदा और आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकी समूह स्लीपर सेल और विदेशी सहयोगियों के माध्यम से भारत में हिंसा फैलाने की कोशिशें कर रहे हैं।
नीति में यह भी बताया गया है कि आतंकवादी संगठन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का उपयोग करके वित्त, भर्ती और परिचालन मार्गदर्शन कर रहे हैं। इंस्टेंट मैसेजिंग एप्लिकेशन, एन्क्रिप्शन टूल, डार्क वेब और क्रिप्टो वॉलेट के जरिए गुमनाम गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। इसके अलावा, आतंकवादी रासायनिक, जैविक, विकिरणीय, परमाणु और विस्फोटक सामग्री तक पहुंचने के प्रयास कर रहे हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चुनौती बनती जा रही है।
नीति के अनुसार, आतंकवादी विदेशी देशों से संचालित होकर स्थानीय बुनियादी ढांचे, रसद और भौगोलिक जानकारी पर निर्भर हैं। इसलिए राष्ट्रीय उपायों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सहयोग को भी मजबूत करना आवश्यक है। गृह मंत्रालय ने कानून और सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि एफआईआर दर्ज करने से लेकर अभियोजन तक हर कदम में कानूनी विशेषज्ञों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
प्रहार में कट्टरपंथ विरोधी कार्यक्रमों पर भी जोर दिया गया है। नीति के अनुसार आतंकी समूह भारतीय युवाओं को भर्ती करने की कोशिशें कर रहे हैं। ऐसे व्यक्तियों की पहचान होने पर पुलिस चरणबद्ध कार्रवाई करती है और उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाते हैं। नीति में समुदाय और धार्मिक नेताओं की भूमिका पर भी ध्यान दिया गया है, ताकि वे युवाओं और समाज में चरमपंथ और हिंसा के परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाएं।
नीति में जेलों में रचनात्मक युवा सहभागिता और कट्टरपंथ रोकने के उपायों पर भी जोर दिया गया है। प्रहार दस्तावेज़ एक समन्वित कानूनी, तकनीकी और समुदाय-आधारित ढांचा प्रदान करता है, जो उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए आवश्यक है।
इस नई नीति के माध्यम से भारत आतंकवाद और साइबर खतरों से निपटने के लिए रणनीतिक और व्यापक तैयारी कर रहा है, ताकि देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

