अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का 7वां दिन: रूस-चीन की मदद पर ईरान का बड़ा बयान, तेहरान समेत कई शहरों पर भीषण हमले
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध सातवें दिन और अधिक भयावह हो गया है। दोनों पक्षों के बीच लगातार हो रहे हवाई हमलों और मिसाइल हमलों ने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रूस और चीन की भूमिका को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
दरअसल, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक रिपोर्टर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से पूछा कि क्या रूस और चीन इस युद्ध में ईरान की सक्रिय मदद कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि रूस और चीन ने हमेशा ईरान की मदद की है। हालांकि जब उनसे दोबारा पूछा गया कि क्या इसका मतलब है कि दोनों देश इस समय भी ईरान की मदद कर रहे हैं, तो अरागची ने जवाब देने से बचते हुए कहा कि वह युद्ध के बीच में इस बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं करेंगे।
उधर अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान के अलावा सनंदज, बुकान, बुशहर और कजविन जैसे कई बड़े शहरों पर जबरदस्त एयर स्ट्राइक की गई है। इन हमलों में ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स और ड्रोन बेस को निशाना बनाया गया है।
अमेरिकी एयरफोर्स ने ईरान के सैन्य ढांचे को कमजोर करने के लिए बड़े पैमाने पर बमबारी की है। बताया जा रहा है कि B-2 और B-52 बॉम्बर विमानों से दो-दो हजार पाउंड के बम गिराए गए। तेहरान में स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा ईरान के मिसाइल डिपो और ड्रोन लॉन्चिंग साइट्स को भी निशाना बनाया गया है।
ईरान की राजधानी तेहरान में अब तक का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है। अमेरिकी हमलों में तेहरान के आजादी फुटबॉल स्टेडियम को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं सनंदज शहर में ईरान के सरकारी प्रसारण संस्थान IRIB की इमारत पर भी बमबारी की गई, जिससे रेडियो और टीवी प्रसारण केंद्र पूरी तरह तबाह हो गए।
ईरान के यज्द इलाके में बैलिस्टिक मिसाइल साइट को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों में भी अमेरिकी फोर्सेज ने हमले किए हैं। इन क्षेत्रों में कुर्द आबादी अधिक है और यहां की कई बॉर्डर पोस्ट तथा पुलिस चौकियां नष्ट हो गई हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इन हमलों के बाद पश्चिमी ईरान के कुछ इलाकों में ईरानी सेना की पकड़ कमजोर हो सकती है। अगर कुर्द लड़ाके इन इलाकों में सक्रिय हो जाते हैं तो ईरान के खिलाफ जमीनी संघर्ष का नया मोर्चा भी खुल सकता है।
इस युद्ध के कारण ईरान के कई हिस्सों में बिजली और पानी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। ईरान के ऊर्जा मंत्री ने स्वीकार किया है कि हमलों की वजह से देश में बिजली और पानी की समस्या बढ़ गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि ईरान हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।
वहीं व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लैविट ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान की 73 प्रतिशत ड्रोन क्षमता और 86 प्रतिशत बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को नष्ट कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ किसी भी तरह की गुप्त बातचीत नहीं कर रहा है और सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
मिडिल ईस्ट में जारी यह संघर्ष अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। दुनिया की बड़ी शक्तियों की संभावित भूमिका और बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस युद्ध पर टिकी हुई हैं।

