अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप के वैश्विक टैरिफ पर रोक, भारतीय मूल के वकील नील कात्याल की ऐतिहासिक जीत
न्यूयॉर्क: अमेरिका की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of the United States ने पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। इस ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में भारतीय मूल के वरिष्ठ वकील Neal Katyal रहे, जिन्होंने छोटे कारोबारियों की ओर से जोरदार पैरवी की और अदालत को यह मानने पर मजबूर कर दिया कि राष्ट्रपति की शक्तियां संविधान से ऊपर नहीं हैं।
‘हम जीत गए’ – कात्याल की प्रतिक्रिया
फैसले के तुरंत बाद नील कात्याल ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हम जीत गए।” एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी व्यवस्था की ताकत का प्रमाण है कि एक अप्रवासी परिवार का बेटा अदालत में खड़े होकर राष्ट्रपति के फैसले को चुनौती दे सकता है और न्याय पा सकता है।
उन्होंने कहा, “आप चाहे दुनिया के सबसे ताकतवर व्यक्ति हों, लेकिन संविधान को नहीं तोड़ सकते। अदालत ने साफ संदेश दिया है कि कानून का शासन सर्वोपरि है।”
संविधान बनाम राष्ट्रपति की शक्तियां
कात्याल ने दलील दी थी कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को है, न कि राष्ट्रपति को। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताई और टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने कहा, “हमारा संविधान राष्ट्रपति से भी ज्यादा ताकतवर है।”
कात्याल ने इस मामले में सहयोग देने के लिए लिबर्टी जस्टिस सेंटर का आभार भी जताया, जिसने छोटे व्यापारियों की ओर से यह कानूनी लड़ाई लड़ी।
भारतीय मूल और गौरव की कहानी
1970 में शिकागो में जन्मे नील कात्याल के माता-पिता भारत से अमेरिका गए थे। उनकी मां बाल रोग विशेषज्ञ थीं और पिता इंजीनियर। कात्याल ने Yale Law School से कानून की पढ़ाई की और बाद में अमेरिकी न्यायपालिका में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama के कार्यकाल में अमेरिका के कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं।
वर्तमान में वे वॉशिंगटन डीसी स्थित मिलबैंक एलएलपी में पार्टनर हैं और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में प्रोफेसर के रूप में भी कार्यरत हैं। वे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 54 मामलों में बहस कर चुके हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।
मिला सर्वोच्च सम्मान
नील कात्याल को 2011 में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘एडमंड रैंडोल्फ अवॉर्ड’ भी मिल चुका है। उन्हें फेडरल अपीलेट रूल्स की सलाहकार समिति में भी नियुक्त किया गया था।
छोटे कारोबारियों को राहत
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उन छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है, जो ट्रंप प्रशासन के टैरिफ से प्रभावित थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से अमेरिका की व्यापार नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी व्यापक असर पड़ेगा।
नील कात्याल की यह जीत न सिर्फ कानूनी दुनिया में बल्कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए भी गर्व का क्षण मानी जा रही है।

