कहा, “किसी भी परिस्थिति में अस्पताल को सैन्य लक्ष्य नहीं माना जा सकता। यह हमला निर्दोष नागरिकों के खिलाफ अकल्पनीय हिंसा का उदाहरण है।”
भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह इस घटना को ‘सैन्य कार्रवाई’ का रूप देने की कोशिश कर रहा है, जो कि बेहद चिंताजनक है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
भारत ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। MEA ने कहा कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
भारत ने यह भी दोहराया कि वह अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा समर्थन करता है।
अफगानिस्तान में तबाही का मंजर
अफगानिस्तान सरकार के अनुसार, इस हवाई हमले में अस्पताल का बड़ा हिस्सा पूरी तरह तबाह हो गया। बचाव दल लगातार मलबे से शव निकालने और घायलों को इलाज पहुंचाने में जुटे हैं। अब तक करीब 250 से अधिक लोगों के घायल होने की भी पुष्टि हुई है।
स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हमले के बाद अस्पताल में आग लग गई थी, जिससे नुकसान और बढ़ गया। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है।
पाकिस्तान का इनकार
वहीं पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने किसी भी नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया। पाकिस्तान का दावा है कि उसके हमले केवल आतंकवादी ठिकानों पर केंद्रित थे।
हालांकि, अस्पताल पर हुए हमले और भारी नागरिक हताहतों के बाद पाकिस्तान के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
इस घटना के बाद दक्षिण एशिया क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है। भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही रिश्ते तनावपूर्ण हैं, ऐसे में इस तरह की घटनाएं स्थिति को और जटिल बना सकती हैं।
मानवीय संकट की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन हैं। इस घटना ने एक बार फिर युद्ध और संघर्ष के दौरान नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष
काबुल के ओमिद अस्पताल पर हुआ यह हमला न केवल एक त्रासदी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है। भारत ने जिस तरह से इस मुद्दे को उठाया है, उससे साफ है कि अब इस मामले पर वैश्विक स्तर पर गंभीर चर्चा और कार्रवाई की जरूरत है।

