10 Apr 2026, Fri

कनाडा ने बढ़ाई अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मुसीबत, दे दी 21 दिनों की डेडलाइन; भारतीय छात्र भी लपेटे में

कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर सख्ती बढ़ाई, 21 दिन में दस्तावेज जमा करने का नोटिस जारी

कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अपने नियम और सख्त कर दिए हैं, जिससे हजारों छात्रों की चिंता बढ़ गई है। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय छात्र भी शामिल हैं। इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) ने छात्रों को नोटिस भेजकर 21 दिनों के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करने का आदेश दिया है, ताकि उनके स्टडी परमिट नियमों के पालन की जांच की जा सके।

इस नए फैसले से अंतरराष्ट्रीय छात्रों में घबराहट का माहौल बन गया है। कनाडा सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी छात्र वास्तव में मान्यता प्राप्त संस्थानों (Designated Learning Institutions – DLI) में पढ़ रहे हैं और सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। यदि कोई छात्र तय समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करता है, तो उसका अस्थायी निवासी (Temporary Resident) स्टेटस रद्द किया जा सकता है।

नोटिस में छात्रों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे गए हैं। इनमें उनके संस्थान से जारी एक आधिकारिक पत्र शामिल है, जो उनकी वर्तमान नामांकन स्थिति की पुष्टि करता है। इसके अलावा, छात्रों को अपने पिछले और वर्तमान संस्थानों की मार्कशीट (ट्रांसक्रिप्ट) भी जमा करनी होगी, ताकि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि की जांच की जा सके।

यह कदम हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसे कनाडा की संसद में 23 मार्च को पेश किया गया था। इस रिपोर्ट में इंटरनेशनल स्टूडेंट प्रोग्राम में धोखाधड़ी (फ्रॉड) को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी। कनाडा की ऑडिटर जनरल केरेन होगन ने इस दौरान कहा कि विभाग को उपलब्ध जानकारी के आधार पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि कार्यक्रम की विश्वसनीयता बनी रहे।

पिछले कुछ वर्षों में फर्जी दस्तावेजों और नियमों के उल्लंघन के मामले बढ़ने की खबरें सामने आई हैं। इसी कारण कनाडा सरकार अब अपने सिस्टम को और मजबूत बनाने और निगरानी को कड़ा करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहेगी और केवल योग्य व वास्तविक छात्रों को ही इसका लाभ मिलेगा।

हालांकि, इस सख्ती को लेकर विशेषज्ञों और इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स की अलग-अलग राय है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई जरूरी तो है, लेकिन इसमें काफी देर हो चुकी है। उनका मानना है कि जिन मामलों में गड़बड़ी हुई थी, उनमें शामिल कई छात्र पहले ही अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं या आगे बढ़ चुके हैं।

कुछ विशेषज्ञ यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या केवल छात्रों की ही जिम्मेदारी है या कुछ कॉलेजों और एजेंटों की भूमिका भी इसमें शामिल है। इससे यह मुद्दा और गंभीर हो जाता है कि आखिर इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए।

कनाडा के इमिग्रेशन विभाग को सभी आरोपों की जांच करने और हर महीने की 15 तारीख तक हाउस ऑफ कॉमन्स की स्थायी समिति को रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसमें धोखाधड़ी और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी शामिल होगी।

इस नए नियम और 21 दिन की समय सीमा ने छात्रों के बीच चिंता बढ़ा दी है। कई छात्रों को दस्तावेज जुटाने में कठिनाई हो सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही किसी परेशानी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्द से जल्द सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर जमा करें, ताकि उनकी इमिग्रेशन स्थिति पर कोई असर न पड़े।

कनाडा सरकार की यह सख्ती आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए और चुनौतियां पैदा कर सकती है, जबकि सरकार का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को बनाए रखना है।

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