24 Feb 2026, Tue

ऊपर फर्राटा भरेंगी गाड़ियां, नीचे टहलेंगे हाथी! जंगल के बीच से गुजरेगी सड़क, दिल्ली-देहरादून के बीच NHAI ने बनाया अनोखा हाईवे!

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे: तेज सफर और वन्यजीव सुरक्षा का अनोखा मेल

दिल्ली से देहरादून का सफर अब तेज होने के साथ-साथ पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित भी होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने दिल्ली–देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के गणेशपुर–देहरादून सेक्शन को इस तरह डिजाइन किया है कि ऊपर से गाड़ियां तेज रफ्तार से चलेंगी और नीचे से हाथी, हिरण और अन्य वन्यजीव सुरक्षित तरीके से गुजर सकेंगे।

इस कॉरिडोर में एनिमल क्रॉसिंग, अंडरपास, प्रोटेक्टिव फेंसिंग और ईको-सेंसिटिव प्लानिंग को शामिल किया गया है। सबसे खास हिस्सा है 12 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, जो एशिया का सबसे लंबा है। यह संरचना राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के पास से गुजरती है, जहां हाथी, हिरण और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं, और रिस्पना व बिंदाल नदियों के ऊपर से होकर जाती है। लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह एलिवेटेड संरचना 575 पिलरों पर टिकी है, जिससे वन्यजीवों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं आती।

यात्रा समय में बड़ी कटौती
6-लेन वाले इस एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद दिल्ली–देहरादून की यात्रा समय मौजूदा 6.5 घंटे से घटकर केवल 2.5 से 3 घंटे हो जाएगी। कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। परियोजना की कुल लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपये है और इसे चार हिस्सों में बांटा गया है। यह दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर बागपत, शामली, सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाएगी।

आधुनिक संरचना और सुरक्षा
इस एक्सप्रेसवे में 340 मीटर लंबी डेटकाली सुरंग, 16 एंट्री-एग्जिट प्वाइंट, 113 अंडरपास और 5 रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं। सहारनपुर का 80 किमी हिस्सा और 12 किमी का एलिवेटेड रोड पहले ही पूरा हो चुका है और कुछ हिस्सों पर यातायात भी शुरू हो गया है। इस परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2021 में रखी गई थी और इसे 2020 में स्वीकृत किया गया था।

NHAI ने इस परियोजना में विकास और वन्यजीव संरक्षण का संतुलन बखूबी साधा है। इससे न केवल यात्री समय की बचत करेंगे, बल्कि जंगल के बीच रहने वाले हाथियों और अन्य प्रजातियों को सुरक्षित आवागमन मिलेगा। यह परियोजना भारत में स्मार्ट और ईको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण मानी जा रही है।

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