मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच दक्षिण एशिया में भी तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर बड़े सैन्य हमले का दावा किया है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा हालात और संवेदनशील हो गए हैं। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से कथित हमलों के जवाब में कई जगहों पर एयरस्ट्राइक और ड्रोन अटैक किए गए हैं।
नूर खान एयरबेस पर ड्रोन हमला
अफगानिस्तान ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित Nur Khan Airbase को निशाना बनाया। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी तस्वीरों में एयरबेस के ऊपर ड्रोन हमले के दृश्य दिखाए गए हैं। बताया जा रहा है कि एयरबेस के पास फाइटर जेट भी खड़े थे।
नूर खान एयरबेस पाकिस्तान की वायुसेना के लिए एक अहम सैन्य ठिकाना माना जाता है। इस हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा में भी कार्रवाई
अफगानिस्तान ने बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी Quetta में सेना की 12वीं डिवीजन के मुख्यालय को भी निशाना बनाने का दावा किया है। इसके अलावा Khyber Pakhtunkhwa में भी हमले किए जाने की बात कही गई है।
अफगान अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से काबुल और बगराम समेत अन्य क्षेत्रों में किए गए हमलों के जवाब में की गई है।
डूरंड लाइन पर बढ़ा तनाव
अफगान सेना ने डूरंड लाइन के पास स्थित पाकिस्तानी चेकपोस्ट्स को निशाना बनाने और उन्हें आग के हवाले करने का दावा किया है। कुनार बॉर्डर ब्रिगेड और छठी बॉर्डर बटालियन की ओर से तोप और गोले दागे जाने की बात भी सामने आई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, तोर्खम इलाके में पाकिस्तानी समर्थित मिलिशिया के चेकपॉइंट्स और वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। अफगान सेना का कहना है कि उन्होंने पाकिस्तानी मिलिशिया को भारी क्षति पहुंचाई है और आगे की रणनीतिक बढ़त जारी है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। पहले से ही मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक सुरक्षा संतुलन प्रभावित है, ऐसे में दक्षिण एशिया में नई सैन्य झड़पें स्थिति को और जटिल बना सकती हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। पाकिस्तान की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है तो इसका असर न केवल द्विपक्षीय संबंधों पर बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ेगा।
फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस घटनाक्रम पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए हालात को नियंत्रित किया जा सकेगा।

