मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने अमेरिका के अत्याधुनिक F-35 Lightning II फाइटर जेट को निशाना बनाया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच सैन्य टकराव अपने चरम पर पहुंचता दिख रहा है। हालांकि, अमेरिकी सेना ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ईरान के इस ताजा दावे से पहले भी IRGC ने अमेरिकी F/A-18 Super Hornet को मार गिराने का दावा किया था। इस दावे के समर्थन में एक वीडियो भी जारी किया गया, जिसमें एक फाइटर जेट पर मिसाइल जैसे हमले का दृश्य दिखाई देता है। वीडियो में जेट के पास एक तेज चमक दिखाई देती है और उसके बाद वह नियंत्रण खोता हुआ नजर आता है। हालांकि, वीडियो में जेट के गिरने या पूरी तरह नष्ट होने का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता।
अब ईरान ने दावा किया है कि उसने एक बार फिर F-35 को निशाना बनाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनके स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ने यह कार्रवाई की और जेट को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया। इससे पहले भी ईरान कई बार F-15 Eagle और F-16 Fighting Falcon जैसे विमानों को मार गिराने के दावे कर चुका है।
वहीं, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड CENTCOM ने इन सभी दावों को “पूरी तरह झूठ” करार दिया है। CENTCOM ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी वायुसेना का कोई भी विमान न तो गिराया गया है और न ही किसी तरह का नुकसान हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान द्वारा जारी किए गए वीडियो और बयान भ्रामक हैं और इनका उद्देश्य केवल प्रचार करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में यह “सूचना युद्ध” (Information Warfare) का हिस्सा बन चुका है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं। एक ओर ईरान अपने एयर डिफेंस सिस्टम की ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है, वहीं अमेरिका इन दावों को गलत बताते हुए अपनी सैन्य बढ़त बनाए रखना चाहता है।
मध्य-पूर्व में जारी इस संघर्ष ने क्षेत्रीय स्थिरता को गंभीर चुनौती दी है। लगातार बढ़ते सैन्य तनाव और परस्पर विरोधी दावों के कारण स्थिति और जटिल होती जा रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ेंगे या कूटनीतिक प्रयासों से कोई समाधान निकल पाएगा।

