ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान पर ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ‘ईरान के आतंकवादी शासन को पूरी तरह तबाह कर रहे हैं’
अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तीखा बयान जारी किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए दावा किया कि अमेरिका ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में लगातार बढ़त बना रहा है और ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह तबाह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास बेजोड़ मारक क्षमता और असीमित गोला-बारूद है, जिसके दम पर ईरान के आतंकवादी शासन को हर मोर्चे पर कमजोर किया जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका सैन्य, आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर ईरान को पूरी तरह से नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने मीडिया के कुछ हिस्सों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान वास्तविक स्थिति को सही तरीके से पेश नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा कि अगर लोग कुछ अखबारों की रिपोर्ट पढ़ें तो उन्हें यह भ्रम हो सकता है कि अमेरिका इस संघर्ष में आगे नहीं बढ़ रहा है, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है और उसकी वायुसेना लगभग समाप्त हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के मिसाइल सिस्टम, ड्रोन क्षमता और सैन्य ठिकानों को भी लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ट्रंप के अनुसार अमेरिकी सेना की कार्रवाई से ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे नष्ट हो चुके हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच जारी सैन्य अभियान को लगभग दो सप्ताह से अधिक समय हो चुका है। इस दौरान खाड़ी क्षेत्र और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास कई सैन्य गतिविधियां देखी गई हैं।
अमेरिकी सेना के अनुसार ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान के कई नौसैनिक ठिकानों, मिसाइल लॉन्चरों और रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हाल ही में कुछ वीडियो फुटेज भी जारी किए, जिनमें ईरान के नौसैनिक ठिकानों पर हमले और माइनलेयर जहाजों को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों के बाद ईरान की नौसैनिक क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि इस अभियान की शुरुआत में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों और नेताओं को भी निशाना बनाया गया था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना फिलहाल मुश्किल है। दूसरी ओर ईरान की ओर से भी कई बार जवाबी कार्रवाई की बात कही गई है।
इस बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी संघर्ष को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यह युद्ध शुरू नहीं किया, लेकिन देश की सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए पूरी क्षमता के साथ काम कर रही है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह सैन्य तनाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को प्रभावित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर चुके हैं।
फिलहाल क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।

