तीन जरूरी ब्लड मार्कर जो आपके स्वास्थ्य का पूरा हाल बताते हैं
रूटीन ब्लड टेस्ट अक्सर सिर्फ बेसिक पैरामीटर जैसे हीमोग्लोबिन, शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान देते हैं। लेकिन कुछ खास ब्लड मार्कर शरीर में छिपे हुए इम्बैलेंस का पता लगाने में मदद करते हैं और लंबी अवधि की बीमारियों के रिस्क को पहले से ही चिन्हित कर सकते हैं। दिल्ली स्थित AIIMS की जनरल फिजिशियन और न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका सेहरावत ने इंस्टाग्राम वीडियो में तीन महत्वपूर्ण ब्लड मार्कर के बारे में बताया, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।
1. सीरम होमोसिस्टीन लेवल
सीरम होमोसिस्टीन शरीर में क्लॉटिंग टेंडेंसी का मुख्य इंडिकेटर है। डॉ. सेहरावत के अनुसार इसका लेवल सामान्यत: 15 µmol/L से कम होना चाहिए। विटामिन B12 की कमी हो तो होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ जाता है। होमोसिस्टीन का बढ़ना रक्त में क्लॉटिंग की संभावना को भी बढ़ाता है। इसलिए यह ब्लड मार्कर दिल की बीमारी, स्ट्रोक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर इवेंट्स के शुरुआती संकेत के लिए बेहद अहम है।
2. सीरम फेरिटिन
फेरिटिन एक प्रोटीन है जो शरीर में आयरन स्टोर करता है। लो फेरिटिन स्टोर के लक्षणों में लगातार थकान, सुस्ती, सांस फूलना, बाल झड़ना और रूखी त्वचा शामिल हैं। नाखूनों का टूटना या त्वचा का रूखा होना भी लो फेरिटिन का संकेत हो सकता है। डॉ. सेहरावत बताती हैं कि अगर ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अपने फेरिटिन लेवल की जांच कराना चाहिए। सही आयरन स्टोरिंग से एनर्जी लेवल और सामान्य स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखे जा सकते हैं।
3. फास्टिंग इंसुलिन लेवल
फास्टिंग इंसुलिन लेवल इंसुलिन रेजिस्टेंस का महत्वपूर्ण मार्कर है। बढ़ा हुआ इंसुलिन लेवल यह बताता है कि शरीर धीरे-धीरे ग्लूकोज को सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पा रहा। यह स्थिति समय के साथ मेटाबोलिक सिंड्रोम, कार्डियोवैस्कुलर रोग, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकती है। शुरुआती स्तर पर फास्टिंग इंसुलिन की जांच कर मेटाबोलिक इम्बैलेंस को समय रहते पहचानना संभव है।
निष्कर्ष
इन तीन ब्लड मार्कर – सीरम होमोसिस्टीन, सीरम फेरिटिन और फास्टिंग इंसुलिन – को नजरअंदाज करना आपके स्वास्थ्य पर लंबी अवधि में असर डाल सकता है। सही समय पर टेस्ट कराना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सक से परामर्श लेना आपके स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करता है।

