3 Mar 2026, Tue

आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में फहराया गया ‘लाल झंडा’, क्यों लगाते हैं, क्या है इसका मतलब?

खामेनेई की मौत के बाद कोम की जामकरन मस्जिद पर फहराया गया लाल झंडा, ईरान में प्रतिशोध का संकेत

ईरान के पवित्र शहर कोम स्थित Jamkaran Mosque के गुंबद पर लाल झंडा फहराया गया है। यह कदम ईरान के सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद उठाया गया है, जिनकी तेहरान में एक हवाई हमले के दौरान मृत्यु हुई। इस हमले को United States और Israel की संयुक्त सैन्य कार्रवाई बताया जा रहा है।

शिया परंपरा में लाल झंडा प्रतिशोध और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। इसे तब फहराया जाता है जब किसी बड़े नेता या निर्दोष व्यक्ति की हत्या होती है और उसका बदला लिया जाना बाकी हो। जामकरन मस्जिद के गुंबद पर लाल झंडा फहराने का सीधा संदेश है कि देश शोक में है और जवाबी कार्रवाई की भावना प्रबल है।

लाल झंडे का धार्मिक महत्व

शिया मान्यताओं के अनुसार, लाल रंग अन्यायपूर्ण तरीके से बहाए गए खून का प्रतीक है। यह परंपरा इमाम हुसैन की शहादत से जुड़ी मानी जाती है। प्राचीन अरब में यदि किसी कबीले के प्रमुख की हत्या हो जाती थी और बदला बाकी रहता था, तो उसके घर या कब्र पर लाल झंडा लगा दिया जाता था। बदला पूरा होने पर इसे हटाकर काला या हरा झंडा लगाया जाता था।

जामकरन मस्जिद का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि शिया परंपरा में इसे 12वें इमाम, इमाम महदी से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है। यहां लाल झंडा फहराने का अर्थ केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि धार्मिक स्तर पर प्रतिरोध का संकेत भी माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने खामेनेई की मौत को “ईरान के लिए नए युग की शुरुआत” बताया है। दोनों नेताओं ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक कदम करार दिया।

हालांकि, ईरान में इस घटना के बाद भारी आक्रोश देखा जा रहा है। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। मिडिल ईस्ट के अन्य देशों में भी तनाव बढ़ गया है और कई जगहों पर अमेरिका और इजरायल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं।

तीन सदस्यीय परिषद का गठन

संकट की इस घड़ी में ईरान में शासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद का गठन किया गया है। इसमें राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian, मुख्य न्यायाधीश Gholam-Hossein Mohseni-Ejei और मौलवी Alireza Arafi को शामिल किया गया है। यह परिषद तब तक देश का प्रशासन संभालेगी, जब तक असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नए सुप्रीम लीडर का चयन नहीं कर लेती।

विश्लेषकों का मानना है कि जामकरन मस्जिद पर लाल झंडा फहराया जाना केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि संभावित सैन्य और राजनीतिक प्रतिक्रिया का संकेत भी है। खामेनेई की मौत ने पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

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