ईरान पर हमलों में अमेरिका ने 48 घंटे में झोंक दिए 470 अरब रुपये के हथियार, रिपोर्ट से बढ़ी चिंता
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाई लगातार चर्चा में बनी हुई है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती 48 घंटों में ही अमेरिका ने भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि इन हमलों में अमेरिका ने लगभग 5.6 बिलियन डॉलर यानी करीब 470 अरब रुपये के हथियार खर्च कर दिए।
रिपोर्ट के मुताबिक यह सैन्य अभियान 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब United States और Israel ने मिलकर Iran के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की। इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने बड़ी संख्या में एडवांस्ड मिसाइलों और एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह आंकड़ा अमेरिकी कांग्रेस में बढ़ती चिंता को भी दिखाता है। कई सांसदों का कहना है कि इतनी तेज गति से अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल अमेरिकी सेना के हथियारों के भंडार को प्रभावित कर सकता है। खासकर तब, जब यह ऑपरेशन लंबे समय तक जारी रहता है।
The Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार, यह अनुमान सोमवार को अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश किया गया था। इस रिपोर्ट ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई का अमेरिकी सैन्य तैयारियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि Donald Trump के नेतृत्व वाला प्रशासन इस अभियान को जारी रखने के लिए जल्द ही कांग्रेस को अतिरिक्त रक्षा बजट की मांग भेज सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव का विरोध कुछ डेमोक्रेट सांसद कर सकते हैं। इससे पहले भी कई डेमोक्रेट नेताओं ने इस सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और इसे रोकने की कोशिश की थी।
इस पूरे मामले पर Sean Parnell, जो पेंटागन के चीफ स्पोक्सपर्सन हैं, ने कहा कि अमेरिकी रक्षा विभाग के पास राष्ट्रपति द्वारा तय किए गए किसी भी मिशन को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह से तैयार है और ऑपरेशन को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में सक्षम है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिकी सेना ने 2000 से अधिक हथियारों का इस्तेमाल किया है। इनमें टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें और अत्याधुनिक एयर डिफेंस इंटरसेप्टर शामिल हैं।
United States Central Command के अनुसार, अब तक 5000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले किए जा चुके हैं। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता और रणनीतिक ठिकानों को कमजोर करना बताया जा रहा है।
हालांकि इस युद्ध के दौरान ईरान की जवाबी कार्रवाई ने कई रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान ने कुछ मामलों में अमेरिकी और इजरायली एयर डिफेंस सिस्टम के महत्वपूर्ण हिस्सों को निशाना बनाया है और कई बार उन पर भारी भी पड़ा है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि Russia ईरान को खुफिया जानकारी प्रदान कर रहा है, जिससे वह अमेरिकी सेना के खिलाफ अपने हमलों की सटीकता बढ़ाने में सक्षम हो रहा है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
कुल मिलाकर, ईरान के खिलाफ जारी यह सैन्य अभियान अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और सैन्य रणनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस युद्ध की दिशा और इसके वैश्विक प्रभाव पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

