12 Apr 2026, Sun

अमेरिका की इकॉनमी को लगा ईरान युद्ध का ग्रहण! सुपरपावर हुआ पस्त, भारत को मिल रही लगातार गुड न्यूज

Middle East Crisis का असर: अमेरिका की रफ्तार धीमी, भारत की अर्थव्यवस्था को ADB से मिला बड़ा बूस्ट

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। जहां एक ओर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था संयुक्त राज्य अमेरिका की आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ रही है, वहीं दूसरी ओर भारत की ग्रोथ को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) की ताजा रिपोर्ट ने भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर आर्थिक जगत का ध्यान खींचा है।

अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है।
साल 2025 की चौथी तिमाही में अमेरिका की जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 0.5% रही, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कमजोर मानी जा रही है।

पूरे वर्ष 2025 में अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर 2.1% दर्ज की गई, जबकि 2024 में यह 2.8% और 2023 में 2.9% थी। लगातार गिरावट यह संकेत देती है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

भारत के लिए बड़ी राहत की खबर

इसके विपरीत, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में बनी हुई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने वित्त वर्ष 2026 के लिए भारत की विकास दर 6.9% रहने का अनुमान लगाया है।

इससे पहले विश्व बैंक ने भी भारत की ग्रोथ 7.6% तक रहने की संभावना जताई थी। लगातार मजबूत अनुमान यह दिखाते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर और तेजी से बढ़ रही है।

घरेलू मांग बनी भारत की ताकत

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत घरेलू मांग है। देश में खपत (कंजम्पशन) लगातार बेहतर बनी हुई है, जिससे उद्योगों और सेवाओं को समर्थन मिल रहा है।

इसके अलावा सरकारी निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी विकास को गति दे रही है।

ADB की चेतावनी भी अहम

हालांकि एशियन डेवलपमेंट बैंक ने सकारात्मक अनुमान के साथ कुछ जोखिमों की ओर भी इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।

इससे महंगाई बढ़ने की आशंका है, जो एशियाई देशों की आर्थिक गति को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा वैश्विक वित्तीय स्थितियों के सख्त होने से कर्ज महंगा हो सकता है, जो विकास के लिए चुनौती बन सकता है।

2027 के लिए भी मजबूत अनुमान

ADB ने 2027 के लिए भी भारत की विकास दर 7.3% रहने का अनुमान दिया है। इसका कारण यूरोपीय संघ के साथ संभावित व्यापार समझौते, सरकारी वेतन वृद्धि और लगातार आर्थिक सुधार बताए जा रहे हैं।

हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक ने थोड़ा सतर्क रुख अपनाते हुए 2027 के लिए 6.9% ग्रोथ का अनुमान जताया है।

वैश्विक आर्थिक संतुलन में बदलाव के संकेत

मौजूदा परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन बदल रहा है। जहां संयुक्त राज्य अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं धीमी रफ्तार का सामना कर रही हैं, वहीं भारत जैसे उभरते देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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