वाशिंगटन और वेनेजुएला के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी नौसेना ने ड्रग तस्करी के आरोप में पूर्वी प्रशांत महासागर में एक और जहाज पर घातक हमला किया है, जिसमें कम से कम चार लोगों की मौत हो गई है। इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी टकराव और गहरा गया है।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला अमेरिका की उस व्यापक सैन्य कार्रवाई का हिस्सा है, जो कथित रूप से ड्रग तस्करी में शामिल जहाजों के खिलाफ सितंबर से जारी है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि यह हमला एक “घातक काइनेटिक स्ट्राइक” था, जिसे “नार्को-तस्करी संचालन” में संलिप्त एक जहाज के खिलाफ अंजाम दिया गया। इस ताजा हमले के बाद, सितंबर से अब तक अमेरिकी कार्रवाई में मारे गए लोगों की संख्या 99 तक पहुंच गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही वेनेजुएला पर आरोप लगा चुके हैं कि वह अपने तेल कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल ड्रग तस्करी और अपराधी नेटवर्क को फंडिंग देने में कर रहा है। इसी आरोप के आधार पर अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल व्यापार पर प्रतिबंध लगाए हैं और उसके तेल टैंकरों की नाकेबंदी शुरू कर दी है। हाल के दिनों में अमेरिका ने इस क्रम में वेनेजुएला के एक तेल टैंकर को जब्त भी किया था।
अमेरिकी हमलों को देखते हुए वेनेजुएला ने अब अपने जहाजों को सैन्य एस्कॉर्ट के साथ भेजना शुरू कर दिया है। इससे पूर्वी प्रशांत महासागर और कैरेबियन सागर में सीधे सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है। वेनेजुएला का कहना है कि अमेरिका की ये कार्रवाइयां ड्रग तस्करी रोकने के नाम पर उसकी संप्रभुता पर हमला हैं।
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वाशिंगटन का असली मकसद ड्रग तस्करी रोकना नहीं, बल्कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन कराना है। मादुरो ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से फोन पर बातचीत की और अमेरिकी “धमकियों में बढ़ोतरी” तथा क्षेत्रीय शांति पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई।
अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद वेनेजुएला ने अपने तेल कारोबार को सामान्य रूप से जारी रखा है। गौरतलब है कि वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार हैं। अमेरिका द्वारा लगाए गए बैन के बावजूद देश कच्चे तेल और उसके उप-उत्पादों का निर्यात कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है। चीन, जो वेनेजुएला के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, ने खुलकर उसका समर्थन किया है। चीन के विदेश मंत्री ने वेनेजुएला के विदेश मंत्री यवान गिल से बातचीत में कहा कि बीजिंग सभी तरह की एकतरफा धमकियों और प्रतिबंधों का विरोध करता है और देशों की संप्रभुता की रक्षा का समर्थन करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और वेनेजुएला के बीच यह बढ़ता तनाव न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीतिक संतुलन पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।

