18 Feb 2026, Wed

₹81,000 करोड़ के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को NGT से मिली मंजूरी, जानें भारत के लिए इतना जरूरी क्यों है ये प्रोजेक्ट- सरकार बनाएगी एयरपोर्ट, पोर्ट, पावर प्लांट

NGT से मिली मंजूरी: 81,000 करोड़ के ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट को हरी झंडी, रणनीतिक तौर पर भारत के लिए बेहद अहम

नई दिल्ली: National Green Tribunal (NGT) की छह सदस्यीय विशेष पीठ ने 81,000 करोड़ रुपये के Great Nicobar Island मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि प्रोजेक्ट को दी गई पर्यावरणीय स्वीकृति में पर्याप्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं और उसमें हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं मिला।

जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले में प्रोजेक्ट के “रणनीतिक महत्व” को भी रेखांकित किया। पीठ में न्यायिक सदस्य जस्टिस दिनेश कुमार सिंह, जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल, अफरोज अहमद और ईश्वर सिंह शामिल थे।

क्या है ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट?

करीब 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट के तहत 130 वर्ग किलोमीटर वन भूमि का डायवर्जन और लगभग 10 लाख पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। परियोजना में एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, इंटीग्रेटेड टाउनशिप, सिविल और मिलिट्री एयरपोर्ट तथा 450-MVA गैस और सोलर पावर प्लांट के निर्माण की योजना है।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणीय नुकसान और स्थानीय निकोबारी समुदाय के विस्थापन की आशंकाएं भी सामने आई हैं। 2004 की सुनामी से प्रभावित इस क्षेत्र में पारिस्थितिकी संतुलन को लेकर कई विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।

पर्यावरणीय शर्तों के साथ मंजूरी

NGT ने स्पष्ट किया कि सरकार को पर्यावरण मंजूरी की सभी शर्तों का सख्ती से पालन करना होगा। ट्रिब्यूनल ने लेदरबैक समुद्री कछुए, निकोबार मेगापोड, खारे पानी के मगरमच्छ, रॉबर केकड़ा, निकोबार मकाक और अन्य स्थानीय प्रजातियों की सुरक्षा के लिए विशेष उपायों का जिक्र किया।

साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया कि फोरशोर डेवलपमेंट के कारण तटों पर कटाव, शोरलाइन में बदलाव या रेतीले समुद्र तटों को नुकसान नहीं होना चाहिए। ये तट न केवल द्वीप की प्राकृतिक सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, बल्कि कछुओं और पक्षियों के घोंसले बनाने के लिए भी अहम हैं।

रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट?

ग्रेट निकोबार द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद रणनीतिक बनाती है। यह क्षेत्र Strait of Malacca के करीब स्थित है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है।

इस परियोजना के जरिए भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सामरिक और आर्थिक उपस्थिति को मजबूत कर सकेगा। ट्रांसशिपमेंट पोर्ट बनने से भारत वैश्विक सप्लाई चेन का एक अहम केंद्र बन सकता है।

सैन्य दृष्टिकोण से भी यह स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां से हिंद महासागर में चीन की गतिविधियों, खासकर जहाजों और पनडुब्बियों की निगरानी आसान होगी। आपदा या युद्ध जैसी स्थिति में यह क्षेत्र भारत को रणनीतिक बढ़त दे सकता है।

संतुलित विकास की चुनौती

NGT ने अपने आदेश में “बैलेंस्ड अप्रोच” की जरूरत पर जोर दिया है, जिसमें विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।

ग्रेट निकोबार मेगा प्रोजेक्ट भारत की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के हितों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी होगी।

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