पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत: सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई, लेकिन बढ़ा एक्सपोर्ट टैक्स—जानें पूरा गणित
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर आम जनता की चिंता के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसके साथ ही डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर भारी ड्यूटी भी लगा दी गई है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि इस फैसले के पीछे असली रणनीति क्या है।
महंगाई से राहत देने की कोशिश
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के चेयरमैन Vivek Chaturvedi के अनुसार, सरकार का मुख्य उद्देश्य आम जनता को महंगाई से राहत देना है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार ने टैक्स कम करके कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की है, ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
तेल कंपनियों की अंडर-रिकवरी को राहत
सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) लंबे समय से घाटे में चल रही थीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद घरेलू स्तर पर कीमतें स्थिर रखी गई थीं।
इससे कंपनियों की “अंडर-रिकवरी” बढ़ती जा रही थी, यानी उन्हें नुकसान हो रहा था। टैक्स में कटौती से इस वित्तीय दबाव को कम करने की कोशिश की गई है, ताकि तेल कंपनियों की स्थिति बेहतर हो सके।
निर्यात पर ड्यूटी लगाने का कारण
सरकार ने डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 29.5 रुपये प्रति लीटर की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में इन ईंधनों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है।
जब वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, तो कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ा देती हैं, जिससे देश में कमी हो सकती है। इस स्थिति से बचने के लिए सरकार ने निर्यात पर टैक्स बढ़ाया है, ताकि घरेलू आपूर्ति सुरक्षित रहे।
हर 15 दिन में होगा रिव्यू
सरकार ने यह भी तय किया है कि विंडफॉल टैक्स या स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) की हर 15 दिन में समीक्षा की जाएगी। इससे बाजार की परिस्थितियों के अनुसार तेजी से निर्णय लिया जा सकेगा।
शुरुआती 15 दिनों में इस टैक्स से लगभग 1500 करोड़ रुपये की कमाई का अनुमान लगाया गया है।
राजस्व पर पड़ेगा असर
एक्साइज ड्यूटी में कटौती का सीधा असर सरकार के राजस्व पर पड़ेगा। अनुमान है कि अगले 15 दिनों में सरकार को लगभग 7000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है।
हालांकि, सरकार का मानना है कि मौजूदा हालात में आम जनता को राहत देना प्राथमिकता है, इसलिए यह कदम जरूरी था।
वैश्विक तनाव का असर
हाल ही में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस वजह से कच्चे तेल की कीमतों में करीब 50% तक उछाल देखने को मिला है।
इसी बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के चलते सरकार को यह बड़ा आर्थिक फैसला लेना पड़ा।
निष्कर्ष
सरकार का यह कदम एक संतुलित रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें एक तरफ आम जनता को राहत देने की कोशिश की गई है, तो दूसरी तरफ घरेलू तेल आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए निर्यात पर नियंत्रण लगाया गया है।
आने वाले समय में तेल की वैश्विक कीमतें और भू-राजनीतिक हालात इस फैसले की सफलता को तय करेंगे। फिलहाल, यह कदम महंगाई पर कुछ हद तक अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।

