11 Feb 2026, Wed

शॉपिंग बैग ब्राउन कलर के ही क्यों होते हैं, रोज इस्तेमाल करने वाले भी नहीं जानते; क्या आपको पता है

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर अक्सर हम अनोखे और रोचक फैक्ट्स पढ़ते हैं। आज हम आपको शॉपिंग बैग के रंग से जुड़ा एक ऐसा ही मजेदार और ज्ञानवर्धक फैक्ट बताएंगे, जिसे जानकर आप चौंक जाएंगे। क्या आपने कभी गौर किया है कि किचन में, स्टोर रूम में या शॉपिंग मॉल से आने वाले सामान हमेशा ब्राउन कलर के बैग में ही पैक होते हैं? चलिए जानते हैं इसका कारण।

सोशल मीडिया पर वायरल फैक्ट

इंस्टाग्राम पर @mkecopac हैंडल से शेयर की गई एक पोस्ट हाल ही में वायरल हो रही है। इस पोस्ट में सवाल पूछा गया था – “पेपर बैग भूरे क्यों होते हैं?” और इसके जवाब में वीडियो में बताया गया कि यह रंग नेचुरल और रिसाइकल्ड कागज से आता है।

ब्राउन कलर का कारण

वायरल पोस्ट के अनुसार, पेपर बैग अक्सर भूरे रंग के होते हैं क्योंकि वे रिसाइकल वेस्ट, खासकर रिसाइकल कागज से बने होते हैं। रिसाइकल कागज का प्राकृतिक रंग ब्राउन होता है। शॉपिंग बैग के निर्माण में इसे प्राकृतिक रूप में ही रखा जाता है।

ब्राउन रंग कई प्रकार के कागज के मिश्रण का परिणाम है, जिसमें अखबार, कार्डबोर्ड और अन्य कागज उत्पाद शामिल होते हैं, जिन्हें रिसाइकलिंग के लिए इकट्ठा किया जाता है। इस मिश्रण की वजह से पेपर बैग का रंग प्राकृतिक ब्राउन रहता है।

ब्राउन बैग की खासियतें

  1. नेचुरल और टिकाऊ: ब्राउन कलर लकड़ी के गूदे का प्राकृतिक रंग है। इसे ब्लीच नहीं किया जाता, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल रहता है।

  2. मजबूत और भरोसेमंद: क्राफ्ट पेपर से बने ये बैग प्लास्टिक बैग से ज्यादा मजबूत होते हैं और भारी सामान भी आसानी से सह लेते हैं।

  3. सस्ता और इको-फ्रेंडली: इसे बनाने की प्रक्रिया सरल और किफायती है। रिसाइकल कागज के उपयोग से यह पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाता।

  4. सस्टेनेबल प्रोडक्ट: ब्राउन बैग का इस्तेमाल प्लास्टिक बैग की जगह करने के लिए किया जाता है, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण कम होता है।

क्या इसे कलर किया जा सकता है?

हालांकि ब्राउन बैग को रंगना संभव है, लेकिन ज्यादातर कंपनियां इसे नेचुरल ब्राउन कलर में ही उपयोग करती हैं। इसका कारण है कि प्राकृतिक रंग पर्यावरण के अनुकूल है और उत्पादन की लागत कम रखता है।

निष्कर्ष

तो अगली बार जब आप ब्राउन शॉपिंग बैग देखें, तो समझ जाइए कि यह केवल रंग का मामला नहीं है, बल्कि पर्यावरण, मजबूती और रिसाइकलिंग का स्मार्ट चुनाव है। सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर वायरल होने वाले ऐसे फैक्ट्स हमें रोजमर्रा की चीजों के पीछे के रहस्य और विज्ञान के बारे में जागरूक करते हैं।

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