27 Feb 2026, Fri

शेयर मार्केट में जलजला, सेंसेक्स 961 अंक टूटकर बंद, निफ्टी धराशाई, निवेशकों के कई लाख करोड़ डूबे

अमेरिकी आंकड़ों और भू-राजनीतिक तनाव से बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 961 अंक टूटा

घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी उठा-पटक देखने को मिली। ताजा विदेशी फंडों की निकासी, अमेरिकी बाजारों से कमजोर संकेत और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों का भरोसा डगमगा गया। नतीजतन प्रमुख सूचकांक एक प्रतिशत से अधिक टूट गए और निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

Bombay Stock Exchange का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 961.42 अंक की गिरावट के साथ 81,287.19 पर बंद हुआ। वहीं National Stock Exchange of India का निफ्टी 317.90 अंक फिसलकर 25,178.65 के स्तर पर आ गया।

विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में यह गिरावट कई मोर्चों पर बढ़ते दबाव का परिणाम है। अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली और एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भारतीय बाजार पर भी असर डाला।

आईटी सेक्टर में दबाव

आईटी शेयरों में बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अनिश्चितताओं और अमेरिकी क्लाइंट्स के खर्च में संभावित कटौती की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी महीने में आईटी सेक्टर के कई शेयरों में अब तक लगभग 20 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

हालांकि गिरावट के इस माहौल में भी कुछ आईटी कंपनियों के शेयरों में सीमित बढ़त देखी गई, लेकिन व्यापक धारणा कमजोर ही रही।

टॉप गेनर और लूजर

सेंसेक्स पैक में सन फार्मा, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, इंटरग्लोब एविएशन, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसे शेयर नुकसान में रहे। दूसरी ओर एचसीएल टेक, ट्रेंट, इंफोसिस और इटरनल के शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सेक्टर-विशेष की बजाय व्यापक बिकवाली का रुख दिखाई दे रहा है, जो निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी को दर्शाता है।

क्या है गिरावट की बड़ी वजह?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों ने बाजार पर दबाव बनाया है। अमेरिका–ईरान परमाणु वार्ता में ठोस प्रगति न होने से मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका है। इससे कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।

इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया है। आय सत्र अपने अंतिम चरण में है और कंपनियों के नतीजों में मिश्रित प्रदर्शन ने भी निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर किया है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाने और लंबी अवधि के नजरिए से निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

बाजार की दिशा अब आने वाले अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर काफी हद तक निर्भर करेगी।

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