वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ देखने को मिला है। United States और Iran के बीच वार्ता विफल होने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते सोमवार को बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन Nifty 50 23,600 के स्तर से नीचे फिसल गया, जबकि BSE Sensex में भी बड़ी गिरावट देखी गई।
सुबह 9:15 बजे बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट साफ नजर आई। सेंसेक्स करीब 1399 अंक गिरकर 76,150 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 410 अंक टूटकर 23,640 के आसपास कारोबार करता दिखा। यह गिरावट वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण आई है, जिसने निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि Donald Trump द्वारा Strait of Hormuz को लेकर दी गई चेतावनी ने बाजार में चिंता और बढ़ा दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार की रुकावट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 8% बढ़कर 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल भी 104 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। तेल की कीमतों में इस तेजी का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो आयात पर निर्भर हैं, जिनमें भारत भी शामिल है।
बाजार में सेक्टोरल स्तर पर भी बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। Coal India, ONGC और Sun Pharma जैसे शेयरों में कुछ मजबूती देखने को मिली, जबकि Bajaj Finance, Asian Paints, Eicher Motors, InterGlobe Aviation और Shriram Finance जैसे शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
शुरुआती कारोबार में बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही। करीब 617 शेयरों में बढ़त देखी गई, जबकि 2246 शेयरों में गिरावट आई और 196 शेयर स्थिर रहे। यह दर्शाता है कि बिकवाली का दबाव व्यापक स्तर पर बना हुआ है।
इसी बीच, भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बढ़ा है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 49 पैसे टूटकर 93.32 के स्तर पर पहुंच गया। फॉरेक्स ट्रेडर्स के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत डॉलर और विदेशी निवेशकों की बिकवाली इसके प्रमुख कारण हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक Strait of Hormuz को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती और अमेरिका-ईरान तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
कुल मिलाकर, वैश्विक घटनाक्रम ने भारतीय बाजार की दिशा को प्रभावित किया है और आने वाले दिनों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

