इजरायल और लेबनान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिख रहा है। दक्षिणी लेबनान में चल रही लड़ाई के दौरान इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के चार सैनिकों की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य सैनिक घायल हुए हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में पहले से ही हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं और लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई जारी है।
इजरायली सेना के अनुसार, मृतकों में कैप्टन नोआम मैडमोनी, स्टाफ सार्जेंट बेन कोहेन और स्टाफ सार्जेंट मैक्सिम एंटिस शामिल हैं। चौथे सैनिक की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। घायलों में से एक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि दूसरे को मध्यम चोटें आई हैं। सेना ने बताया कि सभी प्रभावित सैनिकों के परिवारों को इस घटना की जानकारी दे दी गई है।
यह घटना इजरायल द्वारा शुरू किए गए सैन्य अभियान “ऑपरेशन रोरिंग लायन” के तहत सामने आई है, जो 28 फरवरी से जारी है। इस ऑपरेशन के बाद से अब तक कुल 9 इजरायली सैनिकों की जान जा चुकी है। वहीं, इस संघर्ष में आम नागरिकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक रॉकेट और मिसाइल हमलों में 22 नागरिकों की मौत हो चुकी है।
संघर्ष के दौरान कई रॉकेट हमले इजरायल के उत्तरी क्षेत्रों पर भी किए गए हैं। हाल ही में नहारिया शहर में हुए एक रॉकेट हमले में 43 वर्षीय उरी पेरेट्ज़ की मौत हो गई, जबकि 25 अन्य लोग घायल हुए। इस हमले की जिम्मेदारी हिजबुल्लाह समूह पर बताई जा रही है, जो लंबे समय से इजरायल के खिलाफ सक्रिय है।
इस बीच, इस पूरे क्षेत्रीय संघर्ष में Benjamin Netanyahu का बयान भी सामने आया है। इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा है कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाया जा रहा सैन्य अभियान अब अपने आधे से अधिक लक्ष्य को पूरा कर चुका है। उनके अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की परमाणु और सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है।
नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान की मिसाइल क्षमता को नुकसान पहुंचाया है और हथियार बनाने वाली कई फैक्ट्रियों को भी नष्ट किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कुछ अहम वैज्ञानिकों को भी निशाना बनाया गया है, जिससे उसके कार्यक्रम पर असर पड़ा है।
यह संघर्ष केवल इजरायल और लेबनान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ईरान और हिजबुल्लाह जैसे समूहों की भी भूमिका देखी जा रही है, जिससे पूरा क्षेत्र अस्थिर होता जा रहा है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई ने मिडिल ईस्ट की स्थिति को और जटिल बना दिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष जल्द नहीं रुका तो इसका असर पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा पर पड़ सकता है। आम नागरिकों की जान-माल की हानि बढ़ती जा रही है और दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है।
कुल मिलाकर, इजरायल-लेबनान संघर्ष एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां सैनिकों की मौत और नागरिकों की हानि दोनों ही चिंता का विषय हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस क्षेत्र पर टिकी हुई हैं कि आगे हालात किस दिशा में जाते हैं और क्या शांति की कोई उम्मीद बन पाएगी या नहीं।

