नई दिल्ली: भारत सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है, खासकर जब बात 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतों की हो। विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रूस से तेल आयात और वैश्विक ऊर्जा संकट के सवाल पर कहा कि भारत अपने नागरिकों के हितों को पहले रखेगा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति अस्थिर हो गई है और कई देशों द्वारा रूस से तेल आयात पर चर्चा चल रही है। भारत ने स्पष्ट किया कि उसकी नीति संतुलित और स्वतंत्र है, जो किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं करती।
एनर्जी सिक्योरिटी सबसे बड़ी प्राथमिकता
रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “भारत की ऊर्जा सुरक्षा 1.4 अरब लोगों की जरूरतों पर आधारित है। सरकार ने कई बार कहा है कि यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वैश्विक ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल को देखते हुए हम अपने ऊर्जा स्रोत को डाइवर्सिफाई कर रहे हैं। भारत के सभी निर्णय इसी रणनीति को ध्यान में रखकर लिए गए हैं और भविष्य में भी इसी आधार पर लिए जाएंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की खरीद में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाता है। इसका मतलब यह है कि भारत किसी भी फैसले को अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से परखता है।
वेनेजुएला के साथ लंबे समय का साझेदारी
MEA प्रवक्ता ने वेनेजुएला से भारत के तेल व्यापार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “वेनेजुएला ऊर्जा के क्षेत्र में भारत का लंबे समय से पार्टनर रहा है। 2019-20 तक भारत वहां से ऊर्जा और कच्चा तेल आयात कर रहा था, लेकिन फिर प्रतिबंधों के चलते इसे रोकना पड़ा। 2023-24 में भारत ने फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू किया, लेकिन बाद में फिर प्रतिबंधों की वजह से इसे रोका गया।”
जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत वेनेजुएला सहित किसी भी कच्चे तेल की सप्लाई के व्यावसायिक लाभों पर नजर रखेगा, लेकिन हमेशा राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।
भारत की ऊर्जा रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ऊर्जा रणनीति डाइवर्सिफिकेशन और स्वतंत्र निर्णय पर आधारित है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट, युद्ध या प्रतिबंधों की स्थिति में भी भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।
रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत की नीति किसी भी बाहरी दबाव में प्रभावित नहीं होगी, और देश की ऊर्जा सुरक्षा सामरिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से सर्वोच्च प्राथमिकता है।

