23 Mar 2026, Mon

रूबियो ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय के 2 और जजों पर चलाया हंटर, इजरायल के खिलाफ कार्यवाही पर लगाया बैन

वाशिंगटन: अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के दो और जजों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिन्होंने गाजा में हमास के खिलाफ इजरायल के युद्ध के दौरान संभावित युद्ध अपराधों की जांच शुरू की थी। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को घोषणा की कि जॉर्जिया के जज गोचा लॉर्डकिपानिद्जे और मंगोलिया के एर्डेनेबालसुरेन डामडिन को दंड के लिए नामित किया गया है। इसमें अमेरिकी क्षेत्राधिकार में उनकी संपत्तियों को फ्रीज करना और अमेरिका की यात्रा पर रोक शामिल हो सकती है।

यह कदम इजरायल के खिलाफ आईसीसी कार्रवाई के चलते लिया गया है। ट्रंप प्रशासन ने पहले भी आईसीसी के पूर्व मुख्य अभियोजक और नौ अन्य न्यायिक व सहायक स्टाफ सदस्यों पर प्रतिबंध लगाए थे। इस श्रृंखला में नए प्रतिबंधों के तहत दो जजों को निशाना बनाया गया है, जो इजरायल और अमेरिका के मामलों में आपराधिक शिकायतों की मंजूरी देने या आगे बढ़ाने में शामिल थे।

मार्को रुबियो ने कहा कि आईसीसी इजरायल को निशाना बनाने वाली राजनीतिक कार्रवाइयों में लगातार संलग्न है, जो सभी देशों के लिए खतरनाक मिसाल स्थापित करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संस्था अमेरिका और इजरायल की संप्रभुता का उल्लंघन कर रही है और अमेरिकी एवं इजरायली व्यक्तियों को गलत तरीके से ICC के क्षेत्राधिकार के अधीन ला रही है।

आईसीसी ने इस घोषणा की कड़ी निंदा की है। अदालत ने बयान जारी करते हुए कहा कि ये प्रतिबंध एक निष्पक्ष न्यायिक संस्था की स्वतंत्रता पर हमला हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब न्यायिक अधिकारियों को धमकाया जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था ही खतरे में पड़ जाती है। अदालत ने यह भी कहा कि वह अपने जनादेश को स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ जारी रखेगी

यह कार्रवाई पिछले साल आईसीसी जजों के एक पैनल द्वारा इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद हुई। नेतन्याहू ने वारंट की निंदा करते हुए इसे “बेतुकी और झूठी कार्रवाइयाँ” करार दिया। वहीं, गैलेंट ने कहा कि यह फैसला आत्मरक्षा और नैतिक युद्ध के खिलाफ खतरनाक मिसाल कायम करता है और हत्यारे आतंकवाद को प्रोत्साहित करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी कदम से अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, ICC ने दोहराया कि अदालत अपने न्यायिक कर्तव्यों और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय राजनीति और न्याय के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है, खासकर मध्य पूर्व संघर्ष के संवेदनशील संदर्भ में।

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