22 Mar 2026, Sun

यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा निरस्त, इस वजह से योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 2025 को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। परीक्षा में व्यापक स्तर पर धांधली, प्रश्नपत्र लीक और अवैध धन वसूली के आरोप सामने आने के बाद यह निर्णय लिया गया। मामले की जांच उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा की जा रही थी।

सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या 51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पदों के लिए अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं की जानकारी STF को मिली थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए थे।

STF ने फर्जी प्रश्नपत्र गिरोह का किया खुलासा

जांच के दौरान STF ने 20 अप्रैल 2025 को एक फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। इस मामले में तीन आरोपियों—महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल—को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों पर परीक्षा में धांधली और अवैध धन वसूली के गंभीर आरोप हैं। यह परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई थी।

आयोग का कर्मचारी भी गिरफ्तार

STF की जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी महबूब अली, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष का गोपनीय सहायक था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान उसने विभिन्न विषयों के प्रश्नपत्र हासिल कर लिए थे और उन्हें कई अभ्यर्थियों को पैसों के बदले उपलब्ध कराया।

STF द्वारा की गई गहन विवेचना और डेटा एनालिसिस में महबूब अली की स्वीकारोक्ति की पुष्टि हुई है। मामले की निष्पक्षता और गोपनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से तत्कालीन आयोग अध्यक्ष से त्यागपत्र भी लिया गया था।

कई अन्य संदिग्ध अभ्यर्थी जांच के दायरे में

जांच के दौरान आरोपियों के पास से कई अभ्यर्थियों के मोबाइल नंबर बरामद हुए, जिसके आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद आयोग से संदिग्ध अभ्यर्थियों का डेटा मांगा गया। जांच में परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक धांधली की पुष्टि होने के बाद सरकार ने पूरी परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में पारदर्शी तरीके से परीक्षा आयोजित की जाएगी, ताकि योग्य अभ्यर्थियों के साथ कोई अन्याय न हो।

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